गौतम अडानी की कंपनी ने बनाया 'Gaurav' बम, हवा में तैरकर 100KM की रेंज में दुश्मनों के उड़ा सकता है चिथड़े
Gautam Adani: गौतम अडानी की कंपनी ने बनाया 'Gaurav' बम, हवा में तैरकर 100KM की रेंज में दुश्मनों के उड़ा सकता है चिथड़े
नई दिल्ली। एशिया के टॉप 5 अरबपतियों में शामिल भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी ने भारतीय वायुसेना के लिए घातक बम तैयार किया है। ये बम 100 किमी की रेंज में दुश्मनों की पसीने छुड़ाने की क्षमता रखता है। डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए गए देश के पहले लृग रेंज ग्लाइड बम को बनाने की जिम्मेदारी गौतम अडानी की कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस को मिली। कंपनी ने देश को पहले LRGB बम विकसित कर दिया है। अडानी डिफेंस द्वारा दो बम तैयार किए हैं, जिसमें एक को गौतव( Gaurav) और दूसरे को गौथम( Gautham) का नाम दिया गया है।

अडानी की कंपनी ने बनाया वायुसेना के लिए बम
नी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने वायुसेना के लिए दो बम तैयार किए हैं। तेज रफ्तार और 100 किमी की रेंज के साथ ये बम दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकता है। गौरव और गौथम बम भारतीय वायुसेना के का पहला लॉग्न रेंज ग्लाइड बम है, जो अपने आपको खुद से निवेगिेट और ग्लाइड कर टारगेट को धवस्त कर दुश्मनों के चिथड़े उड़ा सकता है।

क्या है खास
DRDO द्वारा डिजाइन और अडानी डिफेंस द्वारा निर्मात बम गौरव( Gaurav) विंग के जरिए टारगेट को निशाना लगाने की क्षमता रखता है। ये 100किमी की रेंज में अपने दुश्मनों को ध्वस्त कर सकता है। ये 10किमी की ऊंचाई तक जा सकता है। इसका वजन 1000 किलो है, जो 10किमी के एल्टीट्यूड से सफलतापूर्वक निशाना लगाया गया था। आपको बता दें कि इसी तरह की क्षमता इजराइल द्वारा निर्मित स्पाइस 2000 बम की है, जिसके आधार पर अब अडानी डिफेंस भारत में ही इसका निर्माण कर रही है। इसका पहली बार परीक्षण 29 अक्टूबर 2021 को ओडिशा में किया गया था।

Gautham की खासियत
गौरव के अलावा अडानी डिफेंस ने वायुसेना के लिए एक और बम का निर्माण किया है, जिसका नाम गौथम(Gautham) रखा गया। इसकी तुलना गौरव से करें तो ये उससे कम वजनी, कम रेंज वाला बम है। गौथम का वजन 500 किलोग्राम है और यह 30 किमी की रेंज तक में निशाना लगा सकता है। इसकी लंबाई 4 मीटर और ब्यास 0.64 मीटर है। ये बिना विंग वाला बम है, जिसका परीक्षण भी 2019 में किया गया था।

गाइडेड हथियार
ये दोनों ही बम गाइडेड हथियार हैं, जो एटी एयरक्राफ्ट डिफेंस में सेंज से बाहर टारगेट पर निशाना साधने में वायुसेना की मदद करेगा। ये सेना को रेंज से बाहर लक्ष्य पर निशाना लगाने में मदद करेगा। इतना ही नहीं चूंकि ये विंग और बिना विंग वाले बम है, जिसके इस्तेमाल के दौरान जेट फाइटर प्लेन को नुकसान पहुंचने की संभावना बहुत कम हो जाती है।












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