Bitcoin को लंबी रेस में मात दे सकती है ये क्रिप्टोकरेंसी, जानिए कैसे बढ़ रही है आगे?
नई दिल्ली, 3 अगस्त। 2020 में शुरू हुई क्रिप्टोकरेंसी मार्केट की तेजी के बाद दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन ने साल 2021 में धमाकेदार शुरुआत की और रिकॉर्ड स्तर तक गई लेकिन यह तेजी से गिरी और अपने सर्वोच्च स्तर से आधे तक लुढ़क गई। वहीं दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी एथेरियम ने भी 2021 की शुरुआत के बाद से ही तेज उछाल और गिरावट देखी गई है। वैसे तो दोनो डिजिटल करेंसी उतार-चढ़ाव के चलते अस्थिरता का सामना कर रही हैं लेकिन हाल के रुझानों ने ये दिखाया है कि एथेरियम की उपस्थिति मजबूत हुई। एथेरियम में कई मामलों में बेहतर प्रदर्शन करती नजर आती है जिससे लंबे समय में इसमें बिटकॉइन को पीछे छोड़ने की संभावना नजर आती है।

अप्रैल में 64,895 के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने के बाद बिटकॉइन की कीमत तिहाई तक गिर चुकी है। बीच में यह 50 प्रतिशत से ज्यादा तक गिर गई थी। इसके मुकाबले एथेरियम को मई के मध्य में 50 प्रतिशत नीचे आने में ज्यादा समय लगा। अभी तक अधिकतर क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के ही बढ़ने और गिरने के पैटर्न को फॉलो करती रही हैं लेकिन पिछले छह महीनों में इसमें काफी बदलाव आया है। दूसीर डिजिटल करेंसी ने इस पैटर्न को कमजोर किया है।
यह बदलता पैटर्न एथेरियम के लिए दीर्घकालिक स्थिरता स्थापित कर रहा है। एक कनाडाई एक्सचेंज पर एथेरियम ईटीएफ के लॉन्च के बाद एथेरियम ने बिटकॉइन को मजबूती से मात दी। एथेरियम इस मामले में भी अलग है कि बिटकॉइन जहां केवल निवेश के प्रमुख स्रोत और क्रिप्टो संपत्ति के रूप में है वहीं एथेरियम टोकन के साथ ही वित्तीय सेवाओं जैसी चीजों के लिए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भी है।
कैसा चल रहा बाजार का पैटर्न?
एथेरियम ने बिटकॉइन के बाजार के रुख को पीछे छोड़ दिया है। हाल ही में यह क्रिप्टोकरेंसी 2550 डॉलर के निशान से ऊपर उठ गई है। डिजिटल टोकन ने 25000 डॉलर के अपने प्रतिरोध स्तर को तोड़ दिया। हालांकि एथेरियम का हालिया पैटर्न यह दिखा रहा है कि यह वर्चुअल करेंसी 2630 डॉलर के स्तर पर प्रतिरोध का सामना कर रही है और ऊपर बढ़ने में मुश्किल आ रही है।
एथेरियम क्यों बिटकॉइन को मात देने में सक्षम?
बिटकॉइन और एथेरियम दो अलग क्रिप्टोकरेंसी हैं और यह अलग तरीके से भी काम करते हैं। बिटकॉइन को अक्सर भंडार करने वाली डिजिटल करेंसी के रूप में भी देखा जाता है। यह ऐसी संपत्ति में अपनी जगह बना चुकी है जो सोने जैसी मूल्यवान वस्तु के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है। यही वजह है इसे डिजिटल गोल्ड भी कहा जाता है।
बिटकॉइन बाजार में जो तरलता नजर आती है वह उन निवेशकों के चलते है जो इसके ऊंचाई पर होने पर निवेश करते हैं और बाजार लड़खड़ाने पर इसे बाहर निकाल लेते हैं। लेकिन एथेरियम में इस बात का जोखिम अक्सर कम होता है।
बिटकॉइन की लगातार गिरावट
बिटकॉइन की अस्थिरता इस करेंसी के खिलाफ एक प्रमुख वजह बनी हुई है। इसके साथ ही बिटकॉइन माइनिंग में भारी ऊर्जा की खपत, जिसका बड़ा हिस्सा जीवाश्व ऊर्जा से आता है, ने भी दुनिया में बिटकॉइन को लेकर निवेशकों को सोचने पर मजबूर किया है। पिछले दिनों एलन मस्क का बिटकॉइन पेमेंट को वापस लेना और चीन का क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग और ट्रेडिंग पर प्रतिबंध इसी दिशा में बढ़ता कदम है। ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन पर चर्चा तेज हैं बिटकॉइन को लेकर भविष्य में विरोध अधिक हो सकता है।












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