मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट में कटौती के बाद ईएमआई नहीं, बल्कि लोन की समयावधि को कम कर देते हैं बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने ग्राहकों को एक बड़ा तोहफा दिया है और मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट में भारी कटौती की है। इसका अधिक फायदा उन लोगों को होगा, जिन्होंने अधिक लोन लिया हुआ है।

मुंबई। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा लेंडिंग रेट में कटौती किया जाना कर्जदाताओं के लिए अच्छी खबर है, खासकर उन ग्राहकों के लिए जिन्होंने लॉन्ग टर्म लोन यानी 20-25 साल के लिए लोन लिया हुआ है। लेंडिंग रेट में 0.9 फीसदी की कटौती से 25 साल के होम लोन पर सीधे-सीधे 5 साल तक की अवधि कम हो गई है। जब लेंडिंग रेट में बदलाव होता है तो सामान्य तौर पर बैंक ईएमआई में कटौती नहीं करते हैं, लेकिन कर्ज की अवधि को कम कर देते हैं। इस कटौती के बाद 20 साल की अवधि का लोन करीब 3 साल तक कम हो जाएगा। हालांकि, जो लोन अपनी अन्तिम अवधि (अंत के 1-2 साल बचे हैं। में है, उस पर इस कटौती का कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

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वहीं, एमसीएलआर से जुड़े हुए होम लोन में तत्काल कोई फायदा देखने को नहीं मिलेगा। आपको बता दें कि नई दरें लागू होने के बाद हर बैंक अपने हिसाब से उन्हें लागू करते हैं। कुछ बैंक हर तिमाही में ब्याज दरें रिवाइज करते हैं, जबकि कुछ बैंक सालाना ब्याज दरों को रिवाइज करते हैं। जिन बैंकों में तिमाही में ब्याज दरें रिवाइज की जाती हैं, उन बैंकों के ग्राहकों को इस कटौती से अधिक फायदा होगा। वहीं दूसरी ओर, अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो उन ग्राहकों को अधिक फायदा होता है जिनके बैंक सालाना के हिसाब से ब्याज दरें रिवाइज करते हैं। हालांकि, अप्रैल 2016 से पहले लिए गए अधिकतर लोन एमसीएलआर के तहत आते हैं।
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दरअसल, बैंकों में नोटबंदी के बाद काफी अधिक कैश जमा हो गया है। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि अभी आने वाले समय में एमसीएलआर में और भी कटौती हो सकती है। जो ग्राहक एमसीएलआर के तहत लोन को शिफ्ट करना चाहते हैं, उन्हें बैंक को कन्वर्जन फीस देनी होगी। हालांकि, यह अधिक कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए अधिक फायदेमंद है। यदि कोई ग्राहक का 50 लाख रुपये का लोन 25 साल का है और यदि ब्याज दर 9.15 पर्सेंट की बजाय 8.25 फीसदी होता है तो उसे हर महीने 3,000 रुपए से भी अधिक की बचत होगी।

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