क्या कुत्ते के काटने से हुई वाघ बकरी चाय के मालिक पराग देसाई की मौत? इलाज करने वाले अस्पताल ने क्या कहा?

Parag Desai death update News: वाघ बकरी टी ग्रुप के मालिक और कार्यकारी निदेशक पराग देसाई के निधन के बाद ये बात चर्चाओं में आ गई है कि, क्या उनकी मौत कुत्ते के काटने की वजह से हुई है। 49 वर्षीय पराग देसाई का निधन 22 अक्टूबर को हुआ। वो अपने पीछे विदिशा और बेटी परीशा को छोड़ गए हैं। अब पराग देसाई का इलाज करने वाले अस्पताल और वहां के डॉक्टर का कुत्ते वाले मामले पर बयान आया है।

पराग देसाई का इलाज करने वाले गुजरात अस्पताल ने खुलासा किया है कि जब वह 15 अक्टूबर को इलाज के लिए आए थे तो उनके शरीर पर कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने का कोई निशान नहीं था। उन्होंने कहा कि सड़क के कुत्तों से बचने के दौरान गिरने के कुछ दिनों बाद रविवार 22 अक्टूबर को उनका निधन हो गया था।

Parag Desai death Dog

क्या हुआ था पराग देसाई के साथ 15 अक्टूबर को?

रिपोर्ट के मुताबिक पराग देसाई 15 अक्टूबर को गुजरात के अहमदाबाद में अपने घर के पास टहल रहे थे, तभी उनके सिर पर गंभीर चोट लग गई। उन्हें शुरुआत में अहमदाबाद के शैल्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक दिन के बाद, उन्हें शहर के जाइडस अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था।

शैल्बी अस्पताल ने खुलासा किया है कि जब पराग देसाई को अस्पताल लाया गया था तो उनके शरीर पर काटने के कोई निशान नहीं थे। एक बयान में कहा गया कि जब उन्हें अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया तो वह बेहोश थे और कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे।

अस्पताल ने कहा, "हमें बताया गया था कि कुत्तों द्वारा पीछा किए जाने के बाद मरीज (पराद देसाई) गिर गया लेकिन जाहिर तौर पर उसके शरीर पर कुत्ते के काटने के कोई निशान नहीं थे।"

पराग देसाई की मौत पर क्या बोले डॉक्टर?

अस्पताल ने फौरन पराग देसाई का सबड्यूरल हेमेटोमा का इलाज किया गय। शैल्बी हॉस्पिटल्स की ग्रुप सीओओ डॉ. निशिता शुक्ला ने कहा कि उन्होंने पराग देसाई को 72 घंटे तक निगरानी में रखने को कहा है। परिजनों के अनुरोध पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक उसके बाद पराग देसाई को जाइडस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां 22 अक्टूबर को उनकी मौत हुई थी।

कंपनी ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में साझा किया, "गहरे दुख के साथ, हमें अपने प्रिय पराग देसाई के निधन की सूचना देते हुए दुख हो रहा है।"

'स्ट्रीट डॉग्स लवर थे पराग देसाई, इसलिए घबराने का सवाल नहीं उठता'

इस बीच, पशु अधिकार कार्यकर्ता कामना पांडे ने एक्स (ट्विटर का बदला हुआ नाम) पर कहा कि पराग देसाई स्ट्रीट डॉग्स के कट्टर समर्थक थे।

उन्होंने लिखा, "पशु कल्याण समुदाय वाघ बकरी चाय समूह के कार्यकारी निदेशक पराग देसाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है, जो इस मुद्दे के एक उदार हितैषी और स्ट्रीट डॉग्स के कट्टर समर्थक थे। उनका निधन हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी और व्यक्तिगत क्षति है। जानवरों की परवाह करो।''

पशु अधिकार कार्यकर्ता कामना पांडे ने कहा कि, 'चूंकि पराग देसाई स्ट्रीट डॉग्स लवर थे, जानवरों और कुत्ते उनको पसंद थे, इसलिए यह असंभव है कि वह इनसे घबरा जाएं।'

उन्होंने कहा कि, 'कंपनी का आधिकारिक बयान और तथ्य यह है कि सुबह की सैर के दौरान गिरने से लगी चोट के कारण उनकी मृत्यु हो गई। सड़क के कुत्तों के प्रति उनके मजबूत समर्थन और उनके व्यवहार के साथ उनकी परिचितता को देखते हुए, हम ये कह सकते हैं कि वो कुत्तों से घबराए नहीं होंगे। यह संभव नहीं है कि वह कुत्तों के भौंकने या दौड़ने से घबरा गए होंगे।'

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