सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई हारने पर बोले साइरस पी मिस्त्री- 'फैसले से निराश, लेकिन मेरी अंतरात्मा साफ'
मुंबई। देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस पी मिस्त्री के बीच जारी विवाद पर गत शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने एनसीएलएटी के उस आदेश को दर्द कर दिया है जिसमें साइरस पी मिस्त्री को टाटा समूह का दोबारा कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा के खिलाफ शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के आरोपों को भी खारिज कर दिया। 26 मार्च को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अब साइरस पी मिस्त्री की प्रतिक्रिया सामने आई है।

बता दें कि मिस्त्री टाटा समूह के साथ उच्चतम न्यायालय में लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई हार गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोलते हुए साइरस पी मिस्त्री ने मंगलवार को कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले से निजी रूप से निराश जरूर हैं, लेकिन उनकी अंतरात्मा साफ है। मिस्त्री ने कहा कि उनका अब भी यही मानना है कि उन्होंने समूह के लिए जो भी दिशा चुनी थी उसके पीछे कोई बुरी मंशा नहीं थी, वह फैसला दृढ़ विश्वास से लिया गया था। उन्होंने कहा, मैंने पूरी इमानदारी से काम किया।
पी मिस्त्री ने आगे कहा, 'माइनॉरिटी शेयर होल्डर के रूप में मैं कोर्ट के इस फैसले से निराश हूं, हालांकि टाटा समूह का चेयरमैन बनने का जो अवसर दिया गया उसके लिए मैं आभारी हूं।' साइरस पी मिस्त्री ने अपनी टीम के सदस्यों का भी आभार व्यक्त किया है। बता दें कि टाटा समूह में अभी भी साइरस पी मिस्त्री की 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है, उन्होंने कंपनी से अपने शेयर्स निकालने को लेकर अभी किसी कदम का उल्लेख नहीं किया है। मिस्त्री नमक से लेकर सॉफ्टवेयर क्षेत्र में कार्यरत टाटा उद्योग समूह में 27 दिसंबर, 2012 से 24 अक्टूबर, 2016 तक चेयरमैन थे। उन्हें निदेशक मंडल ने कुछ आंतरिक खींचतान के बीच झटके से निकाल बाहर कर दिया था।
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