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शहरी और ग्रामीण भारत में बढ़ी बेरोजगारी दर, कोरोना की स्थिति पर निर्भर अर्थव्यवस्था में सुधार: CMIE

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण और शहरी भारत में बेरोजगारी की दर बीते सप्ताह यानि 25 जुलाई तक बढ़ी है, जो एक सप्ताह पहले की अवधि में हुई आय के आंकड़े के विपरीत है।

नई दिल्ली, 26 जुलाई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण और शहरी भारत में बेरोजगारी की दर बीते सप्ताह यानि 25 जुलाई तक बढ़ी है, जो एक सप्ताह पहले की अवधि में हुई आय के आंकड़े के विपरीत है। 25 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर बढ़कर 7.14% हो गई, जबकि 18 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में यह 5.98% थी।

Unemployment

हालांकि, ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी एक सप्ताह पहले की अवधि में 5.1% से तेजी से बढ़कर 6.75% हो गई। शहरी भारत में, जहां आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक खुल गई हैं, वहां बेरोजगारी की दर राष्ट्रीय और ग्रामीण औसत से अधिक बनी हुई है। 25 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह के लिए बेरोजगारी दर एक सप्ताह पहले की अवधि 7.94% की दर से बढ़कर 8.01% हो गई है।

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जुलाई में पिछले महीनों की तुलना में हालात बेहतर

हालांकि जुलाई में बेरोजगारी का परदृश्य है वह पिछले उन तीन महीनों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर है, जब भारत कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा था। जुलाई की शुरुआत से, शहरी भारत में बेरोजगारी दर 9% से नीचे रही, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 8% से कम रही। वहीं, जून में, मासिक बेरोजगारी दर राष्ट्रीय स्तर पर 9.17%, शहरी भारत में 10.07% और ग्रामीण भारत में 8.75% थी। जुलाई के महीने में मानसून की प्रगति और औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के खुलने से बेरोजगारी दर पिछले महीने की तुलना में कम रही।

दूसरी लहर में गई 2.3 करोड़ नौकरियां

हालांकि भारतीय श्रम बाजार में 7% और 8% की बेरोजगारी दर बताती है कि नौकरी बाजार में जबरदस्त संघर्ष है। कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल-मई के महीने में भारत में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में लगभग 2.3 करोड़ नौकरियां गईं। हालांकि जून के महीने में खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में हालात कुछ सुधरे हुए दिखाई दिये। इस महीने की शुरुआत में जारी सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक जून में करीब 80 लाख नौकरियों की वापसी हुई। आपको बता दें कि सरकार बेरोजगारी और रोजगार की स्थिति को जानने के लिए सीएमआईई के डेटा का इस्तेमाल नहीं करती है।

अच्छी नौकरियों के लिए करना होगा इंतजार

हालांकि विशेषज्ञ और अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि बाजार से अच्छी नौकरियां अभी भी गायब हैं और अच्छी नौकरियों की वापसी अर्थव्यवस्था में सुधार, खपत में वृद्धि और कोरोना महामारी की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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