Zomato-Swiggy वर्कर्स के लिए खुशखबरी! अब मिलेगी पेंशन और इलाज की सुविधा, बस माननी होगी ये शर्त
केंद्र सरकार ने जोमैटो, स्विगी और ओला जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा के नए नियम प्रस्तावित किए हैं। श्रम मंत्रालय द्वारा जारी इन मसौदा नियमों का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के इन कामगारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षित कामकाजी माहौल जैसी सुविधाएं प्रदान करना है।
नए नियमों के अनुसार, किसी भी गिग वर्कर को सरकारी लाभ पाने के लिए एक निश्चित समय तक काम करना अनिवार्य होगा। अगर कोई कर्मचारी किसी एक कंपनी (एग्रीगेटर) के साथ जुड़ा है, तो उसे एक फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में कम से कम 90 दिन काम करना होगा।

एक से ज्यादा कंपनियों में काम करने वालों के लिए क्या है नियम?
वहीं, अगर कोई वर्कर एक से ज्यादा कंपनियों के साथ काम करता है, तो उसके लिए कुल 120 दिन की कार्य अवधि तय की गई है। खास बात यह है कि काम की गिनती बेहद आसान रखी गई है; यदि किसी वर्कर ने एक दिन में किसी भी कंपनी के लिए थोड़ा भी काम करके पैसे कमाए हैं, तो उसे पूरा एक दिन गिना जाएगा।
मल्टीपल एग्रीगेटर्स के लिए खास प्रावधान
सरकार ने उन वर्कर्स का भी ध्यान रखा है जो एक ही दिन में कई ऐप्स पर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई डिलीवरी पार्टनर एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के ऑर्डर डिलीवर करता है, तो उसके खाते में तीन दिन का अनुभव जोड़ा जाएगा। इससे वर्कर्स के लिए साल भर में 120 दिन का कोटा पूरा करना काफी सरल हो जाएगा। यह नियम उन सभी पर लागू होगा जो सीधे कंपनी से जुड़े हैं या किसी थर्ड पार्टी एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे हैं।
रजिस्ट्रेशन और डिजिटल आईडी अनिवार्य
इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए हर गिग वर्कर को केंद्र सरकार के ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद, सरकार प्रत्येक वर्कर को एक डिजिटल पहचान पत्र (Digital ID) जारी करेगी, जिसमें उनकी फोटो और अन्य जरूरी विवरण होंगे। यह आईडी कार्ड देश भर में उनकी पहचान और पात्रता का प्रमाण होगा, जिससे उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
डेटा अपडेट न करने पर होगा नुकसान
नियमों में यह भी साफ किया गया है कि केवल रजिस्ट्रेशन कराना ही काफी नहीं है। वर्कर्स को समय-समय पर अपनी जानकारी जैसे-वर्तमान पता, मोबाइल नंबर, कामकाज का प्रकार और अपनी स्किल्स (हुनर) पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। यदि कोई वर्कर अपनी जानकारी अपडेट नहीं रखता है, तो वह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकता है। सरकार का उद्देश्य इसके जरिए एक सटीक नेशनल डेटाबेस तैयार करना है ताकि सही समय पर सही व्यक्ति तक मदद पहुंच सके।
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