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बासमती चावल से केंद्र ने हटाया MEP, खाद्य तेल पर बढ़ा शुल्क, किसानों की आय पर कैसा असर?

बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) केंद्र ने हटा दिया है। इसके भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने का एक अवसर मिलेगा, जिसका किसानों को सीधा लाभ होगा। केंद्र ने इस बदलाव के साथ धान की कीमतों में 7-10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा। वहीं दूसरी ओर सरकार ने रिफाइंड तेल पर मूल शुल्क को बढ़ाकर 32.5 प्रतिशत करने का फैसला किया है। इस कदम से सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली की फसलों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

खरीफ के फसल से पहले केंद्र के ताजा फैसले के अहम माना जा रहा है। बासमती चावल पर एईपी में कमी और खाद्य तेलों पर शुल्क बढ़ाने से इनकी मांग बढ़ने की उन्मीद की व्यक्त की गई है। कृषि और किसान कल्याण मंत्री, शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "सरकार ने रिफाइंड तेल पर मूल शुल्क को बढ़ाकर 32.5 प्रतिशत करने का फैसला किया है। इस कदम से सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली की फसलों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।"

Basmati rice MEP

वहीं 'इंडिया गेट' ब्रांड के तहत लोकप्रिय बासमती चावल बेचने वाली केआरबीएल लिमिटेड के प्रमुख, बल्क एक्सपोर्ट्स, अक्षय गुप्ता ने कहा, ''अब निर्यात कीमतों की सीमा हटा दी गई है..बासमती चावल पर एमईपी को हटाना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे किसानों और निर्यातकों दोनों को काफी लाभ होने की उम्मीद है। किसानों के लिए, इस बदलाव से धान की कीमतों में 7-10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे उन्हें मूल्य स्तर के रूप में बेहतर आय मिलेगी।"

केआरबीएल के गुप्ता ने कहा, "हम अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के उभरते बाजारों में भी बढ़ती दिलचस्पी देख रहे हैं, जहां उपभोक्ता अधिक किफायती मूल्य पर बासमती की प्रीमियम अपील की ओर आकर्षित हो रहे हैं।"

वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, "मोदी सरकार किसानों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उसने रिफाइंड तेल पर मूल शुल्क बढ़ाकर 32.5% करने का फैसला किया है। इससे सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली की फसलों की मांग बढ़ेगी। किसानों को इन फसलों के लिए बेहतर दाम मिलेंगे और छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में रिफाइनरियों की वृद्धि के साथ, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।"

बता दें कि भारत वैश्विक बाजार में बासमती चावल का प्रमुख निर्यातक और उत्पादक है, इसके बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान है। एपीडा के अनुसार, भारत ने 2023-24 में दुनिया को 48,389.18 करोड़ रुपये में 5.2 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया। पिछले साल प्रमुख निर्यात गंतव्य सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और यमन थे। एक अन्य बासमती चावल निर्यातक डीआरआरके फूड्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित मारवाहा ने भी कहा कि सरकार द्वारा लगाए गए मूल्य बाधाओं को हटाना उद्योग के लिए फायदेमंद है।

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