Budget Session Today: आ गया आर्थिक सर्वेक्षण, वित्त मंत्री ने पेश किया देश की अर्थव्यवस्था का 'रिपोर्ट कार्ड'
Budget Session Today: भारतीय संसद के बजट सत्र 2026 का आगाज 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दमदार अभिभाषण के साथ हो चुका है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में 'विकसित भारत' के संकल्प और सरकार की उपलब्धियों का खाका पेश किया, लेकिन अब सबकी निगाहें सत्र के दूसरे दिन यानी 29 जनवरी 2026 पर टिकी हैं। आज का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी 'रिपोर्ट कार्ड' से कम नहीं है, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के पटल पर 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (Economic Survey) पेश किया है।
यह दस्तावेज न केवल पिछले एक साल की आर्थिक तरक्की का आईना है, बल्कि आने वाले आम बजट की दिशा और दशा भी तय करेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू उम्मीदों के बीच, यह सर्वे बताता है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार क्या रहने वाली है और महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को कितनी राहत मिलने की उम्मीद है।

पेश हुआ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26
संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा आर्थिक सर्वेक्षण को पटल पर रखा गया है। यह रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति का सबसे विश्वसनीय और आधिकारिक विश्लेषण प्रदान करती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11:00 बजे के करीब इसे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश किया। इसके बाद दोनों सदनों को 1 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभ की कार्यवाही अब 1 फरवरी को बजट पेश होने के एक घंटे बाद शुरू होगी।
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आखिर क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण सरकार का वह प्रमुख दस्तावेज है जो पिछले एक वित्त वर्ष (2025-26) के दौरान देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की पूरी तस्वीर पेश करता है।
- विकास का लेखा-जोखा: इसमें खेती, उद्योग, सेवा क्षेत्र और निर्यात जैसे प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति का विवरण होता है।
- भविष्य का अनुमान: सर्वे में आगामी वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान लगाया जाता है।
- चुनौतियां और समाधान: यह रिपोर्ट उन आर्थिक चुनौतियों को भी रेखांकित करती है जिनका सामना देश कर रहा है और उनसे निपटने के सुझाव देती है।
किसके नेतृत्व में तैयार होता है यह दस्तावेज?
आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की होती है। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों की एक विशेष टीम तैयार करती है। वर्तमान में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के मार्गदर्शन में यह रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
बजट से पहले क्यों है इसकी अहमियत?
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, केंद्रीय बजट से ठीक पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है। इसकी महत्ता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि:
बजट का आधार: यह बजट में किए जाने वाले संभावित ऐलानों और प्राथमिकताओं का आधार बनता है।
सेक्टर-वार विश्लेषण: इससे यह समझने में मदद मिलती है कि सरकार किन क्षेत्रों पर अधिक निवेश या सब्सिडी देने पर विचार कर सकती है।
निवेशकों के लिए संकेत: शेयर बाजार और विदेशी निवेशक इस सर्वे को गौर से देखते हैं ताकि वे भारतीय बाजार की चाल का अंदाजा लगा सकें।
1 फरवरी को पेश होगा आम बजट
आर्थिक सर्वेक्षण के जरिए देश की आर्थिक सेहत की जानकारी मिलने के बाद, 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना पूर्ण बजट पेश करेंगी। बजट सत्र के पहले दो दिन-राष्ट्रपति का भाषण और आर्थिक सर्वेक्षण-उस बड़ी तस्वीर की नींव रखते हैं, जिसका अंतिम स्वरूप बजट के दिन सामने आता है। अब देश को इंतजार है कि आज के सर्वे में खेती, मध्यम वर्ग और रोजगार को लेकर क्या सकारात्मक संकेत मिलते हैं।
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