Budget 2026: बजट से पहले जानें शेयर मार्केट का हाल, क्या हैं निवेशकों की बड़ी उम्मीदें
Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानि 1 फरवरी 2026 को अपना नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। इस बार का बजट केवल सरकारी खातों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि शेयर बाजार के करोड़ों निवेशकों की उम्मीदों का पिटारा भी है।
बाजार में फिलहाल 'खामोशी से पहले वाली हलचल' है। निफ्टी अपने ऊपरी स्तरों से 1000 अंक टूट चुका है और निवेशक इस दुविधा में हैं कि संडे को आने वाला बजट बाजार को 'बूस्टर' देगा या 'करंट' लगाएगा। आइए बाजार की उम्मीदों और चुनौतियों पर एक नजर डालते हैं।

बजट से पहले बाजार क्यों है 'सावधान'?
इतिहास गवाह है कि बजट का दिन बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) भरा रहता है। जनवरी के महीने में निफ्टी पहले ही 2% से अधिक गिर चुका है। एक्सपर्ट का मानना है कि बाजार ने बजट को लेकर अपनी उम्मीदें काफी 'न्यूट्रल' कर ली हैं। पिछले 15 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बजट वाले दिन निफ्टी में औसत बदलाव महज 0.19% रहा है, लेकिन असली खेल बजट के एक हफ्ते बाद शुरू होता है, जहां रिटर्न सात गुना तक बढ़ जाता है।
LTCG और STCG: टैक्स के बोझ से आजादी की मांग
मार्केट एक्सपर्ट्स और निवेशकों की सबसे बड़ी मांग कैपिटल गेन टैक्स में राहत को लेकर है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, SAS ऑनलाइन के CEO श्रेय जैन और दिग्गज ब्रोकर नितिन कामथ (Zerodha) ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है।
- LTCG में छूट: फिलहाल 1.25 लाख रुपए से अधिक की कमाई पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि इस टैक्स-फ्री लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपए किया जाए।
- STCG में कटौती: शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स अभी 20% है, जिसे घटाकर 10% करने की मांग हो रही है। साथ ही 1.5 लाख रुपए तक की कमाई को टैक्स मुक्त करने की उम्मीद है।
STT का 'दोहरा वार' खत्म करने की चुनौती
बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को लेकर है। नितिन कामथ का तर्क है कि जब शेयरों पर LTCG टैक्स नहीं था, तब STT लगाना तर्कसंगत था। लेकिन अब निवेशकों को हर ट्रांजैक्शन पर STT भी देना पड़ता है और मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स भी। यह 'दोहरी मार' है। एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार या तो STT को पूरी तरह खत्म करे या इसमें बड़ी कटौती करे ताकि घरेलू और विदेशी (FII) निवेशकों का भरोसा बढ़े।
रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस की उम्मीद
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेफरीज और मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, सरकार राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) पर ध्यान देगी। उम्मीद है कि:
- सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) में 10% की वृद्धि हो सकती है।
- रक्षा क्षेत्र (Defense) सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहेगा।
- विकास को गति देने के लिए कुछ नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं, हालांकि बड़े 'धमाकों' की उम्मीद कम है।
संडे को क्या होगा?
बाजार फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। अगर वित्त मंत्री टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और STT/LTCG में राहत देने का ऐलान करती हैं, तो बाजार में शानदार तेजी देखने को मिल सकती है। इसके उलट, अगर सरकार केवल राजकोषीय लक्ष्यों पर टिकी रही और निवेशकों को कोई छूट नहीं मिली, तो बाजार अपनी गिरावट का सिलसिला जारी रख सकता है।
बजट से पहले जानें शेयर मार्केट का हाल?
बजट से ठीक पहले शुक्रवार को शेयर बाजार में भारी उठापटक और बिकवाली का माहौल रहा, जिसके चलते तीन दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया और सेंसेक्स करीब 296 अंक गिरकर 82,269 पर बंद हुआ। 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले निवेशकों में अनिश्चितता और 'प्रॉफिट बुकिंग' की होड़ दिखी, जिसका सबसे बुरा असर मेटल सेक्टर पर पड़ा जहां हिंदुस्तान जिंक और वेदांता जैसे शेयरों में 11 से 12 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, एफएमसीजी और मीडिया सेक्टर में कुछ खरीदारी जरूर दिखी, लेकिन निफ्टी के 25,320 के स्तर पर फिसलने और रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जो अब सीधे संडे को आने वाले बजट भाषण के बाद ही अगली चाल तय करेंगे।












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