Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Budget 2026: NRI को बजट में मिल सकती है राहत! प्रॉपर्टी बेचना होगा आसान, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

NRI Property Tax Relief Budget 2026: भारत के आगामी बजट 2026 से अनिवासी भारतीयों (NRIs) को बड़ी उम्मीदें हैं, खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स नियमों के सरलीकरण को लेकर। वर्तमान में, एनआरआई के लिए प्रॉपर्टी बेचने पर टीडीएस (TDS) के नियम रेजिडेंट भारतीयों की तुलना में काफी सख्त और जटिल हैं, जिससे उनका निवेश फंस जाता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार इस बजट में टीडीएस दरों में कटौती और अनुपालन (Compliance) प्रक्रिया को आसान बनाती है, तो न केवल एनआरआई निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट बाजार में विदेशी मुद्रा का प्रवाह भी तेज होगा।

NRI Property Tax Relief Budget 2026

TDS on NRI Property Sale: एनआरआई और रेजिडेंट्स के टीडीएस नियमों में बड़ा अंतर

वर्तमान नियमों के अनुसार, जहां एक रेजिडेंट भारतीय को 50 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी बेचने पर केवल 1% टीडीएस देना पड़ता है, वहीं एनआरआई के लिए यह दर बहुत अधिक है। एनआरआई द्वारा प्रॉपर्टी बेचने पर खरीदार को बिक्री मूल्य पर टैक्स काटना होता है, जो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के लिए 12.5% और शॉर्ट टर्म के लिए 30% तक हो सकता है।

यह भारी अंतर एनआरआई विक्रेताओं के लिए नकदी की समस्या पैदा करता है, क्योंकि उनका एक बड़ा हिस्सा सरकार के पास टीडीएस के रूप में जमा हो जाता है।

ये भी पढ़ें: Budget 2026: 2.03 से 6.81 लाख करोड़ तक! देखें कैसे मोदी राज में 3 गुना बढ़ा भारत का रक्षा बजट

जटिल अनुपालन प्रक्रिया और टैन (TAN) की अनिवार्यता

एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदना खरीदार के लिए भी सिरदर्द साबित होता है। खरीदार को न केवल उच्च दर पर टीडीएस काटना पड़ता है, बल्कि उसे टैन (TAN) नंबर लेना, टैक्स जमा करना और ई-टीडीएस रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता है। इसके विपरीत, रेजिडेंट सेलर के मामले में प्रक्रिया बहुत सरल है। एक्सपर्ट्स की मांग है कि सरकार एनआरआई के लिए भी 'चालान-कम-स्टेटमेंट' जैसी आसान व्यवस्था लागू करे, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों को कागजी कार्यवाही और कानूनी पेचीदगियों से राहत मिल सके।

ये भी पढे़ं: Budget 2026 में महिलाओं की लॉटरी, मोदी सरकार देने जा रही है क्रेडिट, लोन और बीमा का डबल तोहफा

लो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट की कठिन राह

यदि कोई एनआरआई कम टैक्स कटवाना चाहता है, तो उसे आयकर विभाग से 'लो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट' लेना पड़ता है। हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी जटिल और समय लेने वाली है कि कई बार डील होने तक सर्टिफिकेट मिल ही नहीं पाता। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस प्रक्रिया को डिजिटल और समयबद्ध (Time-bound) बनाएगी। नियमों में सरलता आने से एनआरआई को अपना निवेश वापस निकालने (Repatriation) में आसानी होगी, जिससे वे भविष्य में पुनः निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।

ये भी पढे़ं: Union Budget 2026: बजट में टैक्सपेयर्स को मिल सकती है बड़ी राहत, ये 5 बदलाव टैक्स को बनाएंगे आसान

भारतीय शेयर बाजार को होगा फायदा- सिद्धार्थ मौर्य

Vibhavangal Anukulakara Pvt. Ltd. के संस्थापक और प्रबंध निदेशक, सिद्धार्थ मौर्य के अनुसार, यदि सरकार बजट में एनआरआई कर ढांचे में सुधार करती है, तो इससे भारतीय शेयर बाजार और रियल एस्टेट में विदेशी निवेश की बाढ़ आ सकती है। डबल टैक्स रिलीफ और रेमिटेंस संरचनाओं में सरलता से प्रवासी भारतीयों की कर देनदारी कम होगी। यह कदम न केवल एनआरआई की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाएगा, बल्कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और पूंजी बाजार में स्थिरता लाने में भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+