Budget 2026 Liquor Cigarette Kya Sasta Kya Mahanga: कितनी महंगी हो गई शराब? सिगरेट-Tobacco का बजट में क्या हाल
Budget 2026 Liquor, Cigarette, Tobacco Kya Sasta Kya Mahanga: भारत का यूनियन बजट 2026 रविवार (1 फरवरी 2026) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। इस बीच सभी की निगाहें शराब (अल्कोहल), सिगरेट और तंबाकू उत्पादों (जैसे पान मसाला, गुटखा, खैनी) की कीमतों और टैक्स स्ट्रक्चर के सस्ते-महंगे के उतार-चढ़ाव पर टिकी रहीं।
आज से ही (1 फरवरी 2026 से) नई कर व्यवस्था लागू हो गई है, जिससे इन उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य जोखिम कम करना और राजस्व बढ़ाना है, लेकिन आम उपभोक्ता की जेब पर बोझ पड़ेगा। पिछले 5 सालों (2021-2025) का ट्रेंड देखें तो कीमतें लगातार बढ़ी हैं, और 2026 में और तेजी आई है। यहां पॉइंटर में सबकुछ: टैक्स प्रभाव, ट्रेंड, बढ़ोतरी के कारण और संभावित राहत। आइए जानते हैं...

1. टैक्स स्ट्रक्चर कैसे प्रभावित करता है इन उत्पादों की कीमतों को?
शराब (Alcohol Price Hike): जीएसटी लागू नहीं- यह राज्य स्तर की एक्साइज ड्यूटी, वैट और अन्य शुल्कों से टैक्स होती है। दरें राज्यवार भिन्न हैं (जैसे महाराष्ट्र में ऊंची एक्साइज, पंजाब में कभी छूट)। केंद्र का बजट सीधा असर नहीं डालता, लेकिन बजट 2026 में शराब बिक्री पर TCS (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) 1% से बढ़ाकर 2% किया गया है। इससे विक्रेताओं का मुनाफा प्रभावित होगा, और कीमतें बढ़ सकती हैं।
सिगरेट और तंबाकू (Cigarettes-Tobacco Price Hike): पहले 28% जीएसटी + कंपेंसेशन सेस था (कुल 50-60% टैक्स)। अब 1 फरवरी 2026 से 40% जीएसटी + नई एक्साइज ड्यूटी + हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस। सिगरेट पर लंबाई-आधारित एक्साइज ₹2.05 से ₹8.50 प्रति स्टिक; गुटखा पर 91% प्रभावी टैक्स; च्यूइंग तंबाकू पर 82%; पान मसाला पर लगभग 88%। एमआरपी-बेस्ड वैल्यूएशन से टैक्स चोरी रुकेगी।
2. पिछले 5 सालों (2021-2025) का ट्रेंड- शराब (अल्कोहल)
- कीमतें मुख्यतः बढ़ीं-राज्य एक्साइज में वृद्धि से। केंद्र बजट सीधा प्रभाव नहीं डालता, लेकिन राज्य नीतियां प्रभावित करती हैं।
- 2021-2022: कोविड बाद राज्यों ने राजस्व के लिए एक्साइज बढ़ाई, कीमतें 5-10% ऊपर (बड़ा बदलाव नहीं)।
- 2023: पंजाब में 40% कटौती की कोशिश, लेकिन अधिकांश राज्यों में 10-20% बढ़ोतरी; आईएमएफएल पर फोकस।
- 2024: महाराष्ट्र में 50%+ एक्साइज हाइक, कीमतें 30-60% ऊपर; केरल में ₹10-20/लीटर बढ़ोतरी।
- 2025: उत्तराखंड में वैट जोड़ा, दिल्ली में एक्साइज राजस्व बढ़ा-टैक्स बोझ जारी, खपत बढ़ी। कुल 10-30% वृद्धि।
- समरी: मुख्य कारण राज्य एक्साइज/वैट बढ़ोतरी; कुछ राज्यों में छूट, लेकिन कुल ट्रेंड ऊपर।
3. Cigarettes Tobacco Price 5 Years Hike: पिछले 5 सालों (2021-2025) का ट्रेंड: सिगरेट और तंबाकू
टैक्स फ्रेमवर्क में बदलाव-जीएसटी + सेस से ऊंचा बोझ, स्वास्थ्य उद्देश्य से कीमतें बढ़ीं।
- 2021-2023: 28% जीएसटी + कंपेंसेशन सेस + एनसीसीडी (कुल 50-60%)। एनसीसीडी 16% बढ़ा, कीमतें 10-15% ऊपर।
- 2024: 'सिन गुड्स' पर चर्चा, लेकिन बड़ा बदलाव नहीं; अवैध बाजार बढ़ा, कीमतें स्थिर।
- 2025: सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट से नई ड्यूटीज; कंपेंसेशन सेस खत्म की तैयारी; 40% जीएसटी स्लैब, बीड़ी पर 18%; एक्साइज 60-70% ऊपर।
- 2026 से: सेस हटाकर नई एक्साइज + हेल्थ सेस; सिगरेट ₹2.05-8.50/स्टिक, पान मसाला पर हेल्थ सेस।
- समरी: टैक्स बोझ बढ़ा, कीमतें 20-40% ऊपर; डब्ल्यूएचओ के 75% टैक्स सुझाव के करीब।
4. Liquor, Cigarette, Tobacco Kya Sasta-Kya Mahanga: क्या महंगा या सस्ता? एक नजर में
| क्रमांक | उत्पाद | पिछले 5 साल (2021-2025) का ट्रेंड | बजट 2026 में बदलाव |
|---|---|---|---|
| 1 | शराब (आईएमएफएल, बीयर, कंट्री लिकर) | ज्यादातर महंगी (राज्य एक्साइज 10-50% बढ़ा) | टीसीएस 1% से 2%-महंगी (10-20% रिटेल बढ़ोतरी)।
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| 2 | सिगरेट | हाई जीएसटी + सेस से महंगी (10-20% उछाल) | नई एक्साइज + 40% जीएसटी-महंगी (2-8 रुपये/स्टिक)।
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| 3 | तंबाकू/पान मसाला/गुटखा | जीएसटी + सेस से ऊंचा टैक्स, कीमतें बढ़ीं | हाई सेस (एनसीसीडी 60%)-महंगे (20-40% रिटेल)।
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5. कीमतों में बढ़ोतरी के मुख्य कारण?
- टैक्स बोझ: 40% जीएसटी + नई एक्साइज/सेस से कुल भार बढ़ा; रिटेल कीमतें 20-40% ऊपर।
- स्वास्थ्य उद्देश्य: इस्तेमाल कम करना-13 करोड़ यूजर्स पर फोकस; डब्ल्यूएचओ के 75% टैक्स सुझाव।
- प्रशासनिक बदलाव: एमआरपी-बेस्ड टैक्सेशन से चोरी रुकेगी, कलेक्शन बढ़ेगा। एनसीसीडी तंबाकू पर 25% से 60% (इफेक्टिव 25% रखा जाएगा)।
6. क्या कोई राहत या सस्ताई संभव?
- शराब: केंद्र से सस्ता नहीं, राज्य एक्साइज बढ़ रही। टीसीएस बढ़ोतरी से महंगी, लेकिन कुछ राज्यों में छूट संभव।
- सिगरेट/तंबाकू: नई व्यवस्था से महंगे, असंगठित सेक्टर पर ज्यादा असर।
- बीड़ी: 18% जीएसटी से थोड़ी राहत, लेकिन कुल टैक्स हाई। तेंदू पत्तों पर टीसीएस 5% से 2% घटा-कुछ राहत।












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