Budget 2026 Income Tax Kya Badla: 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स कानून, स्लैब्स में क्या बदला-राहत?-LIST
Budget 2026 Income Tax Kya Badla, 1 February 2026: भारत का यूनियन बजट 2026-27 रविवार (1 फरवरी 2026) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुबह 11 बजे लोकसभा सदन में पेश किया। इस बार बजट का थीम 'युवाशक्ति' रहा, जो युवाओं की क्षमता और तीन मुख्य कर्तव्यों (राष्ट्र निर्माण, आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय) पर आधारित है। इस बार के बजट में छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिली है।
नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जो पुराने 1961 के एक्ट की जगह लेगा। साथ ही रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है। टैक्स स्लैब्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं, लेकिन TCS, TDS, एक्सेम्प्शन और पेनल्टी नियमों में राहत दी गई है। हम देखेंगे क्या बदला, किसे राहत मिली, और कैसे फायदा होगा-उदाहरणों के साथ....

1. नया इनकम टैक्स एक्ट क्या है और कब से लागू? (What Is New Income Tax Act)
लागू होने की तारीख: 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट (2025) प्रभावी होगा, जो पुराने 1961 के एक्ट को रिप्लेस करेगा। इसका मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है-कम क्लॉज, कम मुकदमेबाजी और आसान कंप्लायंस।
मुख्य फीचर्स:
- ITR फॉर्म्स (ITR-1, ITR-2) को रीडिजाइन किया गया, ताकि आम आदमी आसानी से भर सके।
- फाइलिंग डेडलाइन: ITR-1 और ITR-2 के लिए 31 जुलाई, लेकिन रिवाइज्ड ITR अब 31 मार्च तक फाइल कर सकेंगे (पहले 31 दिसंबर था)।
- मुकदमेबाजी कम: अतिरिक्त लिटिगेशन घटेगा, अपील प्रोसेस तेज होगी।
- छोटे टैक्सपेयर्स के लिए: nil TDS सर्टिफिकेट लेना आसान, और कंपनियां फॉर्म 15G/15H को डायरेक्ट स्वीकार करेंगी (डिपॉजिटरी के जरिए)।
- कारण: सरकार न्यू रिजीम को प्रमोट कर रही है, और सिस्टम को क्लीनर बनाने पर फोकस। पुराने केस नए एक्ट से प्रभावित नहीं होंगे।
2. टैक्स स्लैब्स में क्या बदला? न्यू vs ओल्ड रिजीम (What Changed In Tax Slabs? New Vs Old Regime)
बजट 2026 में टैक्स स्लैब्स में कोई बदलाव नहीं किया गया-पिछले बजट (2025) से वही स्लैब्स जारी हैं। सरकार न्यू रिजीम को आकर्षक बनाने पर जोर दे रही है, जहां रेट्स कम हैं लेकिन डिडक्शंस सीमित। यहां तुलना:
न्यू टैक्स रिजीम (डिफॉल्ट, कम डिडक्शंस लेकिन लोअर रेट्स)-New tax regime
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000 (सलारिड के लिए)।
- रिबेट (Sec 87A): ₹60,000 तक, जिससे इनकम up to ₹12.75 लाख प्रभावी टैक्स फ्री।
| क्रमांक | इनकम स्लैब (₹) | टैक्स रेट (%) |
|---|---|---|
| 1 | 0 से 4,00,000 | 0 |
| 2 | 4,00,001 से 8,00,000 | 5 |
| 3 | 8,00,001 से 12,00,000 | 10 |
| 4 | 12,00,001 से 16,00,000 | 15 |
| 5 | 16,00,001 से 20,00,000 | 20 |
| 6 | 20,00,001 से 24,00,000 | 25 |
| 7 | 24,00,001 से ऊपर | 30 |
ओल्ड टैक्स रिजीम (ज्यादा डिडक्शंस लेकिन हाई रेट्स)-Old Tax Regime
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹50,000।
- रिबेट: ₹12,500 तक, इनकम up to ₹5 लाख टैक्स फ्री।
- डिडक्शंस: 80C (₹1.5 लाख), HRA, होम लोन इंटरेस्ट आदि जारी।
| क्रमांक | इनकम स्लैब (₹) | टैक्स रेट (%) |
|---|---|---|
| 1 | 0 से 2,50,000 | 0 |
| 2 | 2,50,001 से 5,00,000 | 5 |
| 3 | 5,00,001 से 10,00,000 | 20 |
| 4 | 10,00,001 से ऊपर | 30 |
सीनियर सिटिजंस: न्यू में बेसिक एग्जेम्प्शन ₹4 लाख (60-80 साल), ओल्ड में ₹3 लाख। सुपर सीनियर (80+) के लिए ओल्ड में ₹5 लाख-कोई नया चेंज नहीं।
क्यों कोई बदलाव नहीं? फोकस सिम्पलीफिकेशन पर है, न कि स्लैब्स पर। 30% स्लैब को ₹35 लाख तक बढ़ाने की मांग थी, लेकिन नहीं हुआ।
3. अन्य प्रमुख बदलाव और राहतें
टैक्स स्लैब्स स्थिर, लेकिन कंप्लायंस और राहतों में बदलाव:
- TCS रिडक्शन: विदेशी पढ़ाई, मेडिकल ट्रीटमेंट और ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS 5% से घटाकर 2% (बिना थ्रेशोल्ड)। LRS (लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम) पर भी 5% से 2%।
- एग्जेम्प्शन: मोटर एक्सीडेंट क्लेम अमाउंट और उस पर ब्याज टैक्स फ्री (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिली रकम)। TDS भी हटाया।
TDS चेंजेस:
- NRI द्वारा प्रॉपर्टी बेचने पर TDS अब PAN-बेस्ड, TAN की जरूरत नहीं।
- सप्लाई ऑफ मैनपावर सर्विसेज अब सेक्शन 194C के अंदर (TDS रेट 1-2%)।
- एम्प्लॉयी हायरिंग सर्विस पर TDS 1% से 2%।
पेनल्टी और इम्यूनिटी: (Penalties and Immunity)
- छोटे अपराधों (जैसे 20 लाख से कम संपत्ति छुपाना) पर सिर्फ फाइन, कोई क्रिमिनल केस नहीं। बड़े मामलों में 2 साल तक सजा।
- इम्यूनिटी फ्रॉम पेनल्टी अब मिसरिपोर्टिंग ऑफ इनकम पर भी लागू।
अन्य:
- IT सेवाओं के लिए सेफ हार्बर मार्जिन (ट्रांसफर प्राइसिंग), सीमा 2 करोड़ रुपये।
- को-ऑप सेक्टर को डिविडेंड एक्सेम्प्ट (शर्तों पर)।
- 6 महीने का विंडो फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर के लिए।
- राजकोषीय घाटा GDP का 4.3% अनुमानित।
4. किसे राहत और किसे फायदे? कैसे? समझें... (Who Get Relief Benefit In Budget 2026 Taxpayesr)
राहतें मुख्यतः युवाओं, सलारिड, स्टूडेंट्स, NRI और छोटे टैक्सपेयर्स को। न्यू रिजीम चुनने वालों को ज्यादा फायदा। यहां ब्रेकडाउन:
- सलारिड एम्प्लॉयी और मिडिल क्लास (Tax for Salaried Employees Middle Class): स्टैंडर्ड डिडक्शन और सिम्पल फॉर्म्स से राहत। उदाहरण:- ₹10 लाख सालाना सैलरी वाले (न्यू रिजीम)। टैक्सेबल इनकम: ₹10L - ₹75K = ₹9.25L। टैक्स: ₹20K (4-8L पर 5%) + ₹12.5K (8-9.25L पर 10%) = ₹32.5K। रिबेट से अगर कुल कम, तो बचत। ओल्ड में 80C से ज्यादा सेविंग लेकिन कॉम्प्लिकेटेड-न्यू में ₹5-10K सालाना बचत।
- युवा और स्टूडेंट्स (Tax For Youth-Students): TCS 2% से विदेशी पढ़ाई सस्ती। उदाहरण:- US पढ़ाई के लिए ₹20L रेमिटेंस पर TCS अब ₹40K (2%)-पहले ₹1L (5%)। बचत: ₹60K। टूर पैकेज पर भी यही-फैमिली ट्रिप पर ₹20-30K सेविंग।
- NRI और प्रॉपर्टी ओनर्स (NRIs and Property Owners): TAN की जरूरत नहीं, PAN से TDS। उदाहरण:- NRI ₹50L प्रॉपर्टी बेचते हैं। TDS अब PAN से आसान-पहले TAN रजिस्ट्रेशन की झंझट से बचत ₹5-10K (एडमिन कॉस्ट)।
- छोटे टैक्सपेयर्स और सीनियर्स (Small Taxpayers-Seniors) nil सर्टिफिकेट आसान, 15G/15H डिपॉजिटरी से। उदाहरण:- ₹4L इनकम वाला फ्रीलांसर nil सर्टिफिकेट से TDS अवॉइड-₹20K (5% TDS) बचत। सीनियर के लिए FD इंटरेस्ट पर आसान।
- एक्सीडेंट विक्टिम्स (Accident Victims: Claims Tax-free): क्लेम टैक्स फ्री। उदाहरण:- ₹5L क्लेम + ₹50K इंटरेस्ट पर पहले 30% टैक्स (₹1.65L)। अब छूट-पूर्ण ₹5.5L बचत।
- बिजनेस/प्रोफेशनल: सेफ हार्बर और पेनल्टी राहत। उदाहरण:- ₹15L छुपाने पर सिर्फ फाइन (20L से कम)-कोई जेल। सेविंग: लीगल कॉस्ट ₹50K+।
कुल फायदा: 70% टैक्सपेयर्स (न्यू रिजीम) को 10-20% सेविंग। छोटे अपराधों पर फोकस कम से अर्थव्यवस्था बूस्ट।
5.क्या उम्मीद करें और कैसे तैयार हों?
बजट 2026 में स्लैब्स स्थिर लेकिन TCS/TDS राहतों से मिडिल क्लास और युवाओं को बड़ा फायदा। नया एक्ट से सिस्टम सरल होगा-विदेशी अवसरों में आसानी। अगर इनकम ₹12L से कम, न्यू रिजीम चुनें; ज्यादा हो तो ओल्ड। आयकर पोर्टल पर कैलकुलेटर यूज करें। ज्यादा डिटेल्स के लिए बजट डॉक्यूमेंट्स चेक करें।
नोट: ये बदलाव FY 2026-27 (असेसमेंट ईयर 2027-28) से लागू होंगे। टैक्स कैलकुलेशन के लिए प्रोफेशनल सलाह लें।
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