बजट घोषणाओं से क्या BJP के लिए आसान होगी यूपी चुनाव की राह, क्या खुश होंगे अन्नदाता?
नई दिल्ली, 1 फरवरी। केंद्र सरकार ने आज वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट पेश कर दिया है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस बजट के लोकलुभावने होने के कयास लगाए जा रहे थे। सरकार ने भी बजट घोषणाओं से नाराज किसानों को खुश करने की कोशिश की है। सरकार ने बजट में किसानों और कृषि सेक्टर के लिए कई घोषणाएं की है, हालांकि मिडिल क्लास के लिए बजट में कुछ खास नहीं मिला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण आर्थिक परिस्थिति कठिन होने के बावजूद सरकार ने दो सालों से टैक्स में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। ऐसे में इस बजट को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में खेती और किसानों के लिए कई ऐसे बड़े ऐलान किए, जिसे यूपी चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कृषि कानूनों को सरकार ने भले वापस ले लिया, लेकिन एक साल तक चले इस आंदोलन के कारण किसान नाराज थे, जिनकी नाराजगी को बजट मे दूर करने की कोशिश की गई है। बजट में अगले वित्त वर्ष में किसानों के खाते में 2.37 लाख करोड़ रुपए डीबीटी के जरिए उपलब्ध करवाने का ऐलान किया गय़ा तो वहीं किसानों और कृषि के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई।
बजट में गंगा नदी के किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 5 किमी चौड़े कोरिडोर्स के निर्माण, अगले वित्त वर्ष में 1000 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की घोषणा, किसानों और कृषि में टेक्नॉली को बढ़ावा देने के लिए 'किसान ड्रोन' की घोषणा की गई है। बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीद के लिए 2.37 लाख करोड़ रुपए भुगतान करने का ऐलान किया गया है तो वहीं साल 2013 को मोटा अनाज वर्ष घोषित किया गया है।
बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं को चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जहां किसानों का बड़ा वोट बैंक है।
हालांकि जिस तरह से उम्मीद की जा रही थी कि बजट लुभावना होगा, वैसा कुछ दिखा नहीं। इनकम टैक्स में किसी भी तरह की राहत नहीं मिलने से मिडिल क्लास नाखुश जरूरी है, लेकिन 80 लाख घरों और क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से सरकार ने कुछ लोगों को खुश अवश्य किया है । जहां टैक्स में राहत नहीं मिलने से शहरी मिडिल क्लास बहुत खउश नहीं है तो वहीं खेती का सामान सस्ता कर किसानों को लालीपॉप पकड़ाने की कोशिश की गई है। देखना ये होगा कि बीजेपी नेता इसे चुनाव में कितना भुना पाते हैं। बजट में 60 लाख लोगों को नौकरी मुहैया कराने की बात कही गई हैं, जो युवा वोटरों को लुभाएगी। ऐसे में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के पहले चरण से नौ दिन पहले आए इस बजट का राज्यों के चुनाव पर क्या असर होगा ये तो 10 मार्च को चुनावी नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा।












Click it and Unblock the Notifications