Bank Strike Today: महा-हड़ताल! आज भी नहीं खुलेंगे बैंक, क्या हैं डिमांड, कितना होगा बिजनेस में नुकसान?
Bank Strike News Today: आज 27 जनवरी 2026 को देशभर के सरकारी बैंकों में सन्नाटा पसरा है यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर बुलाई गई इस महा-हड़ताल ने बैंकिंग व्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सबसे ज्यादा परेशानी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के बाद यह लगातार तीसरा दिन है जब बैंक बंद हैं।
देश के कोने-कोने से बैंक शाखाओं पर ताले लटके होने और ग्राहकों के परेशान होने की खबरें आ रही हैं। बैंक यूनियनों की यह नाराजगी केवल वेतन वृद्धि को लेकर नहीं, बल्कि कार्य-संस्कृति में बदलाव की एक बड़ी मांग को लेकर है। इस हड़ताल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक लेन-देन पर पड़ रहा है, जिससे करोड़ों के ट्रांजैक्शन अधर में लटके हैं।

Bank Strike Today: क्यों हो रही है यह महा-हड़ताल?
बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल के पीछे कोई लंबी-चौड़ी लिस्ट नहीं, बल्कि एक प्रमुख और ऐतिहासिक मांग है, 5 दिन का कार्य सप्ताह (5-Day Work Week)।
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शनिवार की छुट्टी पर जोर: वर्तमान में बैंकों में केवल दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश होता है। यूनियन की मांग है कि अन्य सरकारी दफ्तरों और कॉर्पोरेट सेक्टर की तर्ज पर हर शनिवार और रविवार को बैंक बंद रखे जाएं।
40 मिनट अतिरिक्त काम का फॉर्मूला: कर्मचारियों का तर्क है कि वे 5 दिन काम करने के बदले प्रतिदिन 40 मिनट अधिक काम करने को तैयार हैं, ताकि वर्किंग आवर्स में कोई कमी न आए और ग्राहकों का काम प्रभावित न हो।
लंबित नोटिफिकेशन: यूनियनों का दावा है कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन सरकार ने अब तक इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है।
अर्थव्यवस्था को लगा हजारों करोड़ का झटका!
बैंक हड़ताल के कारण बैंकिंग सेक्टर के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो नुकसान का गणित काफी बड़ा है:
| मद | अनुमानित नुकसान (प्रति दिन) |
| चेक क्लियरिंग | ₹15,000 - ₹20,000 करोड़ |
| कुल व्यापारिक नुकसान | ₹25,000 करोड़ से अधिक |
लगातार तीन दिन बैंक बंद होने से चेक क्लियरिंग की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। इसके अलावा कैश डिपॉजिट, विड्रॉल और सरकारी टैक्स पेमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी रुक गए हैं।
ATM पर नकदी का संकट और ग्राहकों की परेशानी
चूंकि आज बैंक बंद होने का तीसरा दिन है, इसलिए कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में ATM से नकदी गायब होने लगी है। लोग कैश के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक भटक रहे हैं। विशेषकर उन छोटे व्यापारियों को ज्यादा दिक्कत आ रही है जिनका दैनिक कारोबार कैश पर आधारित है।
प्राइवेट बैंक खुले, सरकारी में ताले
हड़ताल का असर मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSUs) में देखा जा रहा है:
हड़ताल में शामिल: SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और अन्य सरकारी बैंक।
कामकाज सामान्य: HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे निजी क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी इस हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वहां लेनदेन जारी है।
डिजिटल पेमेंट ने बचाई लाज
भले ही बैंक शाखाओं में ताले लगे हों, लेकिन UPI, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह चालू हैं। राहत की बात यह है कि ऑनलाइन फंड ट्रांसफर और बिल भुगतान जैसे काम बिना किसी रुकावट के हो रहे हैं, जिससे आम जनता को आंशिक राहत मिली है।
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