Bank Privatisation:इस सरकारी बैंक की पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला,क्या होगा ग्राहकों पर असर
Bank Privatisation:इस सरकारी बैंक की पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला,क्या होगा ग्राहकों पर असर
नई दिल्ली। Bank Privatisation. बैंकों के निजीकरण को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार ने आईडीबीआई बैंक( IDBI Bank) की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचन का फैसला कर लिया है। सरकार ने इस बैंक की पूरी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है। आपको बता दें कि सरकार के इस फैसले से ये सरकारी बैंक पूरी तरह से निजी हाथों में चला जाएगा। ऐसे में इसका क्या असर खाताधारकों पर होगा, ये जानना भी जरूरी है।

इस बैंक की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
केंद्र सरकार और एलआईसी( LIC) ने एक और बैंक के निजीकरण की पूरी तैयारी कर ली है। सरकार ने आईडीबीआई बैंक( IDBI Bank) के निजीकरण की रफ्तार तेज कर दी है। बैंक की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया है। आईडीबीआई बैंक में भारत सरकार और एलआईसी दोनों कुल 94 फीसदी हिस्सेदारी है। इसमें 45.48 फीसदी शेयर भारत सरकार के पास और 49.48 फीसदी शेयर LIC के पास है। अब सरकार ने इसकी हिस्सेदारी को बेचने की रफ्तार बढ़ा दी है।

IDBI की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचन को मंजूरी
सरकार ने इस बैंक के विनिवेश के लिए इसकी 100 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने का फैसला कर लिया है। जिसके लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर के लिए आरएफपी में चेंजेज किए गए हैं। वहीं बैंक की गारंटी फीस में भी 5 फीसदी की कटौती कर दी गई है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने वित्तीय बजट के दौरान ही बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय है।

क्या होगा खाताधारकों पर असर
बैंकों के निजीकरण का असर न तो खाताधारकों पर होगा और न ही बैंक के कर्मचारियों पर। सरकार ने पहले ही इस बात की घोषणा कर दी है कि बैंकों के निजीकरण का असर बैंक के कर्मचारियों पर नहीं होगा। उनकी नौकरी पहले की तरह की सुरक्षित रूप से चलती रहेगी। वहीं बैंक के ग्राहकों की जमापूंजी भी पूरी तरह से सुरक्षित है।
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