अरुण जेटली ने 500 और 1000 के नोट बंद होने पर कहीं ये 8 बातें
जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से कोई संबंध है?
नई दिल्ली। अरुण जेटली ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने के कदम को देश के हित में बहुत अच्छा बताते हुए कहा कि इससे देश में भ्रष्टाचार और कालेधन से निपटने में आसानी मिलेगी। पढ़िए अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए क्या कहा-

1- जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से कोई संबंध है? तो उन्होंने इसे साफ नकार दिया और कहा कि अगर इस निर्णय से इलेक्शन सस्ते हो जाते हैं तो ये देश के ऊपर बहुत बड़ा उपकार होगा।
2- वहीं अरुण जेटली ने 2000 रुपए के नए नोट में चिप लगे होने की खबर को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह खबर कहां से आई है इस बात की मुझे कोई जानकारी नहीं है।
3- जेटली से पूछा गया कि ऐसा कदम तो 1978 में भी उठाया गया था। उस समय इसका कोई फर्क नहीं पड़ा तो अब क्या फर्क पड़ेगा? जेटली बोले कि उस समय बाजार में 10 फीसदी से भी की हाई डिनोमिनेशन नोट थे, लेकिन आज के समय में भारत की अर्थव्यवस्था में तकरीबन 86 फीसदी हाई डिनोमिनेशन नोट हैं। ऐसे में यह कदम भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने के लिए उपयोगी साबित होगा।
4- वहीं बाजार में 50 और 100 रुपए के नोट प्रीमियम पर मिलने और 500-1000 के नोट कम कीमत देकर बदले जाने के सवाल पर वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं वह दिक्कत में पड़ जाएंगे। आखिरकार उन्हें भी तो इसका स्रोत बताना पड़ेगा।
5- पीएम मोदी ने कहा था कि लोगों को परेशानी न हो इसके लिए बैंकों में काउंटर बढ़ेंगे और बैंकों की टाइमिंग भी बढ़ाई जाएगी, लेकिन जब इस बारे में जेटली से सवाल किया गया तो वह बचते हुए नजर आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि ग्राहकों के आने के हिसाब से काउंटर और टाइमिंग निर्धारित की जाएगी।
6- अरुण जेटली ने कहा कि इस अहम कदम से उनका मुख्य उद्देश्य लोगों में खर्च करने की आदत को बदलना है। दरअसल, जेटली का इशारा बैंकिंग सिस्टम की तरफ था। सरकार चाहती है कि देश का हर व्यक्ति बैंकिंग सिस्टम से जुड़े ताकि कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।
7- 30 दिसंबर तक कितना पैसा बैंकों में वापस होने के लिए आया, इसका डेटा भी सरकार जारी करेगी।
8- अरुण जेटली से जब ये पूछा गया कि बाजार से पहले 1000 के नोट और उसके कुछ समय बाद 500 के नोट क्यों नहीं वापस लिए गए? इस पर अरुण जेटली बचते नजर आए। वे बोले कि ये सुझाव रिजर्व बैंक का था, जिस पर सरकार ने हामी भरी है।












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