4 साल में 6 बड़े बैंकों ने समेटा कारोबार, कौन-कौन से बैंक हुए बंद और किन-किन पर मंडरा रहा है खतरा

4 साल में 6 बड़े बैंकों ने समेटा कारोबार, कौन-कौन से बैंक हुए बंद और किन-किन पर मंडरा रहा है खतरा

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक और पेमेंट बैंक की सर्विस को बंद करने का निर्देश दिया है। RBI के आदेश के बाद वोडाफोन एम पैसा(Vodafone M-Pesa) पेमेंट बैंक की सर्विस बंद कर दी गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस बैंक का लाइसेंस कैंसल कर दिया है। सर्विस बंद होने के बाद एम-पैसा के पास अब यह अधिकार नहीं होगा कि कंपनी प्रीपेड इन्स्ट्रुमेंट के तौर पर पेमेंट की सुविधा ग्राहकों को उपलब्ध कराए। इससे पहले आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट बैंक लिमिटेड ने भी अपनी सर्विस बंद कर दी। आइडिया पेमेंट बैंक की सर्विस बंद होने के बाद ही वोडाफोन और आइडिया का विलय हुआ था। अब एक और पेमेंट बैंक ने अपनी सर्विस को बंद कर दिया है। इसके साथ ही 4 सालों में 6 पेमेंट बैंकों की सेवा बंद हो गई है। ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर क्यों एक के बाद एक पेमेंट बैंक बंद हो रहे हैं? आइडिया-वोडाफोन से पहले और कौन-कौन से बैंक हैं जिन्हें अपना कारोबार समेटना पड़ा और कौन-कौन से पेमेंट बैंकों पर खतरा मंडरा रहा है?

 Vodafone M-Pesa ने बंद किया कारोबार

Vodafone M-Pesa ने बंद किया कारोबार

वोडाफोन ने अपनी पेमेंट बैंक इकाई 'एम-पैसा' का कारोबार बंद करने का फैसला कर लिया है। रिजर्व बैंक ने वोडाफोन एम-पैसा का लाइसेंस रद्द कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने अपनी सर्विस को बंद करने का फैसला किया।मंगलवार को आरबीआई ने वोडाफोन एम पैसा का सीओए रद्द किया, जिसके बाद कंपनी प्रीपेड भुगतान से जुड़े कार्य नहीं कर सकेगी।

 आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट बैंक को बंद करना पड़ा अपना कारोबार

आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट बैंक को बंद करना पड़ा अपना कारोबार

इससे पहले आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट बैंक ने अपना कारोबार बंद कर दिया। कंपनी ने 1 साल बाद ही अपना कारोबार समेटने की घोषणा की। आइडिया और वोडाफोन के एक के बाद एक पेमेंट बैंक सर्विस बंद करने के बाद 4 चारों के भीतर 6 बैंकों ने अपना कारोबार समेट लिया है। साल 2015 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोगों के घर-घर बैंकिंग सर्विस को पहुंचाने के लिए पेमेंट बैंक की मंजूरी दी थी। आरबीआई ने पेमेंट बैंक के लाइसेंस के लिए आई 41 कंपनियों के प्रपोजल में से सिर्फ 11 कंपनियों को लाइसेंस जारी किया, लेकिन पिछले 4 सालों में 11 कंपनियों में 6 कंपनियों ने अपना कारोबार समेट लिया।

 इन कंपनियों ने समेटा अपना कारोबार

इन कंपनियों ने समेटा अपना कारोबार

पेमेंट बैंक की शुरुआत को 4 साल का वक्त हो चुका है। 4 सालों में भुगतान बैंकिंग बाजार में अब तक छह बड़ी कंपनियां बोरिया बिस्तर समेट चुकी हैं। टेक महिंद्रा, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनैंस कंपनी और दिलीप सांघवी, आईडीएफसी बैंक लिमिटेड और टेलिनॉर फाइनैंशल सर्विसेज के गठबंधन में बना भुगतान बैंक बाजार छोड़ने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। इसके बाद आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट बैंक ने जुलाई में अपना कारोबार समेटने की घोषणा की। अब वोडाफोन एम-पैसा ने अपना कारोबार बंद करने का ऐलान किया है।

 इन कंपनियों पर मंडरा रहा है खतरा

इन कंपनियों पर मंडरा रहा है खतरा

तकरीबन चार वर्षो के बाद एयरटेल(Airtel) और पेटीएम(Paytm) के अलावा अन्य किसी भी पेमेंट बैंक की स्थिति सही नहीं है। कई बैंक तो अभी तक परिचालन भी सही तरीके से शुरू नहीं कर पाए हैं। वहीं कई बैंकों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। आदित्य बिड़ला आइडिया बैंक और वोडाफोन पेमेंट बैंक के बंद होने के बाद अब देश में पेमेंट बैंकों की संख्या घटकर 5 रह जाएगी।

ये 5 पेमेंट बैंक निम्नलिखित हैं।
एयरटेल पेमेंट बैंक
लिमिटेड इंडिया पोस्‍ट पेमेंट बैंक लिमिटेड
फाईनो पेमेंट बैंक लिमिटेड
पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड
जियो पेमेंट बैंक लिमिटेड
एनएसडीएल पेमेंट बैंक लिमिटेड

 क्यों बंद हो रहे हैं पेमेंट बैंक

क्यों बंद हो रहे हैं पेमेंट बैंक

पेमेंट बैंक बंद होने की बड़ी वजह कारोबार में लगातार हो रहा घाटा है। जुलाई 2019 में आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को ये जानकारी दी कि पेमेंट बैंक में अपेक्षित कामयाबी नहीं मिलने की वजह से वो अपने कारोबार को बंद करना चाहते हैं। वहीं प्रधानमंत्री जन धन योजना को सरकारी बैंकों ने अपने स्तर पर इतनी तेजी से लागू किया कि साल 2017 तक देश की 99.7 फीसदी जनसंख्या सीधे बैंकों से जुड़ गई। ऐसे में इन लोगों के मोबाइल पेमेंट बैंकों की जरूरत नहीं पड़ रही। वहीं नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देते हुए सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) की शुरुआत की। जिससे पेमेंट बैंकों की प्रासंगिकता और कम हो गई।

वहीं केवाईसी(KYC) के नए नियमों ने ग्राहकों को पेमेंट बैंक से और दूर कर दियया। आरबीआइ ने साफ कर दिया कि हर ग्राहक के लिए केवाईसी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी होगी। केवाईसी की लागत काफी बढ़ गई। कर्ज नहीं देने की बाध्यता से भी इनके पास कमाई का कोई अतिरिक्त जरिया नहीं है। ऐसे में पेमेंट बैंकों को बड़ा झटका लगा।

 क्या है पेमेंट बैंक

क्या है पेमेंट बैंक

पेमेंट बैंक का मकसद लोगों के घरों तक बैकिंग सेवा को पहुंचाना है। इसके जरिए स्माल सेविंग अकाउंट होल्डर्स, लो इनकम हाउसहोल्ड असंगठित क्षेत्र, प्रवासी मजदूरों और छोटे बिजनेसमैन को बैंकिंग सर्विसेस से जोड़ना है। आरबीआई ने 2015 में इसके लिए एनबीएफसी या नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन, मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनियों, सुपर मार्केट चेन चलाने वाली कंपनियों को पेमेंट बैंक शुरू करने का मौका दिया। आरबीआई के पास 41 आवेदन मिले, लेकिन आरबीआई ने 11 कंपनियों को पेमेंट बैंक का लाइसेंस दिया। इन पेमेंट बैंक को बड़ी रकम को जमा करने की इजाजत नहीं होती है और न ही ये पेमेंट बैंक लोन दे सकते हैं। इन्हें क्रेडिट कार्ड जारी करने की इजाजत नहीं होती, हालांकि इन्हें एटीएम/डेबिट कार्ड कार्ड जारी कर सकते हैं।

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