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Fuel Price: तेल कंपनियों को बस चुनाव खत्म होने का इंतजार, पेट्रोल-डीजल के लिए फिर ढीली करनी होगी जेब

नई दिल्ली, 23 अप्रैल। देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे समय में जब लोग कोरोना वायरस महामारी की मार झेल रहे हैं उस पर वाहन ईंधन के कीमतों ने आम आदमी की जेब ढीली कर रखी है। सामने आ रही खबरों की मानें तो आने वाले दिनों में भी पेट्रोल-डीजल के दामों में राहत मिलने की उम्मीद नही हैं। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम बंगाल के आखिरी चरण की वोटिंग यानी 29 अप्रैल या 2 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद तेल कंपनियां ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकती हैं।

चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम

चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियां विधानसभा चुनाव के बाद ईंधन के खुदरा मूल्य में 2 रुपए से 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा सकती हैं। कहा जा रहा है कि चुनावी मौसम में कृत्रिम रूप से कम स्तर पर कीमतों को बनाए रखने से होने वाले घाटे की भरपाई करने के लिए कंपनियों ईंधन के दाम बढ़ाएंगी। सरकारी सूत्रों ने बताया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण तेल कंपनियां वर्तमान में घाटा झेल रही हैं।

3 रुपए और 2 रुपए प्रति लीटर का हो रहा घाटा

3 रुपए और 2 रुपए प्रति लीटर का हो रहा घाटा

सूत्रों ने कहा कि तेल कंपनियां क्रमशः पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर 3 रुपए और 2 रुपए प्रति लीटर की हानि का सामना कर रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय उत्पाद की कीमतों पर भी पड़ा है। इस घाटे से उबरने और ईंधन को वैश्विक बाजार दरों के बराबर लाने के लिए कुछ दिन पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लगातार वृद्धि करके इसकी भरपाई करने की आवश्यकता होगी। सूत्र के मुताबिक 27 फरवरी के बाद से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं।

27 फरवरी से नहीं बढ़े दाम

27 फरवरी से नहीं बढ़े दाम

जबकि मार्च और अप्रैल में ऑटो ईंधन की कीमतों में चार मौकों पर गिरावट आई है, पेट्रोल की कीमतों में 77 पैसे प्रति लीटर और डीजल में राष्ट्रीय राजधानी में 74 पैसे प्रति लीटर की कमी आई है। यह गिरावट तब भी आई है जब फरवरी में औसत भारतीय बास्केट क्रूड का मूल्य 61.22 डॉलर था, जो मार्च में 64.73 डॉलर के औसत से कम था और अप्रैल में अब तक 66 डॉलर प्रति बैरल के करीब है।

और नुकसान नहीं झेल सकती सरकार

और नुकसान नहीं झेल सकती सरकार

इस दौरान पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में गिरावट के चलते ओएमसी में दो उत्पादों की बिक्री पर नुकसान हुआ है। सरकार इस पर अब और नुकसान नहीं झेल सकती। चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हालांकि यह सिर्फ एक संभावना है, ईंधन के दामों में बदलाव सरकार से आने वाले संकेतों पर निर्भर करेगा। 2 मई को पांचों राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें: Fuel Rates: कोरोना संकट के बीच राहत की खबर, आज भी नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें रेट

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