वैभव सूर्यवंशी की IPL सैलरी पर उठा सवाल, कौन है यह शख्स जिसने 1 करोड़ रुपये को बताया फालतू खर्च?
Vaibhav Sooryavanshi: भारतीय खेल जगत में जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने के लिए मशहूर मिनर्वा एकेडमी के डायरेक्टर रणजीत बजाज ने देश के मौजूदा स्पोर्ट्स फंडिंग मॉडल के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और तीखा मोर्चा खोल दिया है। बजाज ने हमारे खेल तंत्र की सबसे बड़ी खामियों को उजागर करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि भारत का पूरा सपोर्ट सिस्टम ही पूरी तरह से उल्टा काम कर रहा है।उन्होंने वैभव सूर्यवंशी को आईपीएल में मिले एक करोड़ की धन राशि पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने हाल ही में एक टॉक शो के दौरान देश में एथलीटों को मिलने वाली सरकारी और कॉपोरेट आर्थिक मदद की टाइमिंग पर गंभीर आपत्ति जताई है। बजाज के अनुसार हमारा सिस्टम किसी खिलाड़ी को तब तक फूटी कौड़ी भी नहीं देता जब तक कि वह अपनी मेहनत और कड़े संघर्ष के दम पर खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह साबित न कर दे।

रणजीत बजाज ने इस पूरे गलत तरीके को रिवर्स रिजर्वेशन का नाम देते हुए समझाया कि भारत में सारा पैसा और बड़े-बड़े स्पॉन्सरशिप फंड केवल उन एथलीटों पर बहाए जाते हैं जो पहले से ही दुनिया के शीर्ष मुकाम पर पहुंच चुके हैं। इसके विपरीत जिन उभरते हुए जूनियर खिलाड़ियों को शुरुआत में सही ट्रेनिंग और पैसों की सख्त जरूरत होती है, उन्हें पूरी तरह उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
वैभव सूर्यवंशी का दिया उदाहरण
उन्होंने हालिया आईपीएल 2026 के सीजन में तहलका मचाने वाले 15 वर्षीय युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए अपनी बात को मजबूती से रखा। बजाज ने पूछा कि जब वैभव सूर्यवंशी जैसे बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को शुरुआत में किट और डाइट के लिए पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब हमारा सिस्टम कहां सोया हुआ था। उन्होंने कहा कि एक करोड़ देने का क्या फायदा? उतने पैसे को वैभव सूर्यवंशी फंड से मदद के लिए अंडर 12 के प्लेयर्स को दिया जाए, तो कितने और वैभव मिल सकते हैं। सूर्यवंशी तो खेल में अंत तक करोड़ों रुपये कमा लेंगे।
खेल अधिकारियों को लिया आड़े हाथों
अगर आईपीएल फ्रैंचाइज़ी ने वैभव पर करोड़ों का दांव लगाकर उन्हें सही मंच प्रदान नहीं किया होता, तो देश की यह अनमोल क्रिकेट प्रतिभा भी सिस्टम की अनदेखी और पैसों की भारी तंगी के कारण समय से पहले ही कहीं गुमनामी के अंधेरे में खो जाती। बजाज ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों हमारे खेल अधिकारी जमीनी स्तर पर स्काउटिंग करने में पूरी तरह नाकाम साबित होते हैं।












Click it and Unblock the Notifications