CBSE Three-Language Policy: क्लास 7, 8 और 9 के छात्रों के लिए बड़ी राहत! नई गाइडलाइंस में क्या-क्या बदलाव?

CBSE Three-Language Policy New Guidelines: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तीन भाषा नीति को और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। खासकर क्लास 7, 8 और 9 में पढ़ रहे मौजूदा छात्रों को लेकर बड़े राहत भरे प्रावधान किए गए हैं। अचानक भाषा बदलने की मजबूरी अब नहीं रहेगी।

CBSE ने 29 जून 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों की रक्षा करते हुए भाषा सीखना सार्थक, रोचक और ज्ञानवर्धक बनाया जाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं पूरी खबर...

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What Is CBSE Three-Language Policy: तीन भाषा नीति क्या है और क्यों आई बदलाव की जरूरत?

NEP 2020 में सिफारिश की गई है कि छात्र तीन भाषाएं सीखें, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं हों। इसका मकसद बहुभाषी दक्षता बढ़ाना, सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और संज्ञानात्मक विकास करना है।

मई 2026 में जारी एक परिपत्र में क्लास 9 के लिए इस नीति को सख्ती से लागू करने की बात कही गई थी। इससे दो विदेशी भाषाएं (जैसे फ्रेंच + जर्मन) पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। सत्र के बीच भाषा बदलने की बात पर विरोध हुआ। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हस्तक्षेप के बाद CBSE ने संशोधित गाइडलाइंस जारी कर माहौल शांत किया।

मौजूदा क्लास 10 बैच को कोई बदलाव नहीं

सबसे बड़ी राहत यह है कि 2026-27 सत्र में क्लास 10 में पढ़ रहे छात्रों को नई नीति का पालन नहीं करना होगा। वे पुरानी व्यवस्था (दो भाषाएं) के अनुसार ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा उनके लिए अनिवार्य नहीं है।

क्लास 7, 8 और 9 के छात्रों को मिली विशेष छूट

CBSE ने मौजूदा बैचों के लिए ट्रांजिशन को आसान बनाया है:

  • क्लास 9 (2026-27): तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। लेकिन जिन छात्रों ने पहले ही दो विदेशी भाषाएं चुन ली हैं, वे उन्हीं को जारी रख सकते हैं और एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (R3) जोड़नी होगी।
  • क्लास 7 और 8 (2026-27): इन बैचों को भी छूट दी गई है। जब ये छात्र क्लास 9 पहुंचेंगे तो तीन भाषाओं का नियम लागू होगा, लेकिन क्लास 10 में तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
  • तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल-आधारित आंतरिक मूल्यांकन से होगा। बोर्ड परीक्षा में कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुख्य बदलाव: छात्रों को बीच सत्र में भाषा नहीं बदलनी पड़ेगी। जो पहले से पढ़ रहे हैं, वे जारी रख सकते हैं।

तीन स्थितियों में समझें अपना विकल्प (क्लास 9 के लिए)

CBSE ने स्पष्ट परिदृश्य दिए हैं:

स्थिति 1: दो भारतीय भाषाएं पहले से पढ़ रहे हैं (जैसे हिंदी + तमिल)

  • तीसरी भाषा में एक और भारतीय भाषा या अंग्रेजी/फ्रेंच जैसी गैर-भारतीय भाषा चुन सकते हैं।

स्थिति 2: एक भारतीय + एक गैर-भारतीय (जैसे तमिल + अंग्रेजी)

  • तीसरी भाषा के रूप में कोई भी भारतीय भाषा चुनें।

स्थिति 3: दो गैर-भारतीय भाषाएं (जैसे अंग्रेजी + फ्रेंच)

  • 2026-27 में विशेष छूट: दोनों विदेशी भाषाएं जारी रखें + एक भारतीय भाषा (R3) जरूर जोड़ें।

क्लास 6 और आगे के बैचों के लिए सख्त नियम

क्लास 6 से शुरू होने वाले नए बैचों पर तीन भाषा नीति पूरी तरह लागू होगी। इनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। जब ये छात्र क्लास 10 पहुंचेंगे तो R3 की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी। NCERT ने 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के लिए समर्पित R3 किताबें जारी कर दी हैं।

विशेष छूट वाले मामले

CBSE ने कुछ वर्गों को राहत दी है:

  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN): RPwD Act 2016 के तहत तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट।
  • विदेश स्थित CBSE स्कूल: भारतीय भाषा (R3) से पूर्ण छूट।
  • विदेश से लौटे भारतीय छात्र: R3 भारतीय भाषा से छूट।
  • अन्य राज्य में स्थानांतरण: चुनी हुई भाषाओं को जारी रखने की छूट, स्कूल को संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

स्कूलों के लिए स्टाफिंग और रिसोर्स की व्यवस्था

CBSE ने स्कूलों को लचीलापन दिया है:

  • मौजूदा शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों या पीजी टीचर्स की नियुक्ति।
  • सहोदय क्लस्टर (स्कूलों के बीच सहयोग)।
  • वर्चुअल/हाइब्रिड क्लासेस।
  • समयबद्ध तरीके से NCERT/CBSE रिसोर्स मटेरियल उपलब्ध कराए जाएंगे।

NEP 2020 का असली मकसद: परीक्षा नहीं, सीखना

CBSE ने जोर दिया है कि भाषा सीखना रट्टा नहीं, बल्कि अवधारणात्मक स्पष्टता, आनंद और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित होना चाहिए। निरंतर मूल्यांकन, नवीन शिक्षण संसाधन और छात्र-केंद्रित तरीके अपनाए जाएंगे।

उद्देश्य है कि कोई भी छात्र नुकसान में न आए। बहुभाषी भारत की विविधता को स्कूली शिक्षा में उतारना है, ताकि छात्र वैश्विक नागरिक बनते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

अभिभावकों और छात्रों के लिए सलाह

  • स्कूल से तुरंत संपर्क कर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
  • भारतीय भाषाओं को सीखने का अवसर समझें - यह भविष्य में सांस्कृतिक और करियर दोनों दृष्टि से फायदेमंद है।
  • घबराएं नहीं, CBSE ने ट्रांजिशन को सुगम बनाने के लिए कई प्रावधान किए हैं।

छात्र हित में संतुलित कदम

CBSE की नई गाइडलाइंस पुरानी व्यवस्था को अचानक तोड़ने के बजाय धीरे-धीरे NEP 2020 की ओर ले जाने का संतुलित प्रयास है। क्लास 7 से 9 के मौजूदा छात्रों को राहत मिली है, जबकि भविष्य के बैचों को मजबूत भाषाई आधार मिलेगा।

यह बदलाव सिर्फ नियम नहीं, बल्कि शिक्षा को अधिक समृद्ध और समावेशी बनाने की दिशा में एक कदम है। स्कूलों, शिक्षकों और अभिभावकों से अपील है कि इन दिशानिर्देशों को सकारात्मक भाव से लागू करें और छात्रों को बहुभाषी भविष्य के लिए तैयार करें। किसी भी अतिरिक्त अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in चेक करें।

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