26/11 के मुंबई हमले से शुरू हुई Yes Bank के तबाही की कहानी
26/11 के मुंबई हमले से शुरू हुई Yes Bank के तबाही की कहानी
नई दिल्ली। साल 2004 में शुरू हुई Yes Bank को वक्त नहीं लगा लोगों के घरों तक पहुंचने में। Yes बैंक ऐसा एकलौता बैंक था, जो औसत से अधि क ब्याज देने के लिए जाना जाता था, लेकिन 15 साल बाद ही ये बैंक बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है। बैंड लोन और एनपीए ने बैंक को डूबने के कगार पर पहुंचा दिया है। लंबे वक्त के कर्ज के बोझ तले दबे यस बैंक को बचाने की कोशिश की जा रही है। बैंक के शेयर लुढ़कते जा रहे हैं, निवेशकों ने बैंक से मुंह मोड़ लिया है। बैंक की खस्ताहालत देखने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंक पर पाबंदियां लगा दी। RBI ने यस बैंक 50000 रुपए से अधिक की निकासी पर रोक लगा दी है। जो बैंक कभी ग्राहकों का सबसे पसंदीदा बैंक हुआ करता था आज उनके लिए मुश्किल की वजह बन गया है। खाताधारक अपनी जमा पूंजी को लेकर परेशान है। उन्हें डर सता रहा है कि अगर बैंक डूबा तो उनकी सेविंग का क्या होगा? इन सब के बीच ये जानना भी जरूरी है कि कैसे महज 15 सालों में ही यह बैंक अर्श से फर्श पर पहुंच गया? बैंक की इस हालात का जिम्मेदार इसके फाउंडर, पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राणा कपूर को माना जा रहा है। एक नजर बैंक के डूबने की इन वजहों पर डालते हैं....

परिवार से शुरू हुई बैंक की बर्बादी की कहानी
साल 2004 में राणा कपूर ने अपने रिश्तेदार अशोक कपूर के साथ मिलकर यश बैंक की शुरुआत की। राणा कपूर की गिनती सफल बैंकर्स में की जाती है। राणा कपूर ने MBA डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने 1980 में बैंक ऑफ अमेरिकामें मैनेजमेंट ट्रेनी के साथ अपने बैंकिंग करियर की शुरुआत की। उन्होंने बैंक ऑफ अमेरिका के साथ 16 साल तक काम किया। 1996 में उन्होंने एएनजेड ग्रिंडलेज इनवेस्टमेंट बैंक के साथ काम किया। साल 2004 में उन्होंने अपने रिश्तेदार और दोस्त अशोक कपूर के साथ मिलकर यस बैंक की शुरुआत की।
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मुंबई हमले के बाद शुरू हुआ विवाद
यस बैंक की शुरुआत के बाद ये लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय होने लगा। बैंक की सबसे बड़ी ताकत थी कि वो अन्य बैंकों से अधिक ब्याज ऑफर करता था, जिसकी वजह से ग्राहक यस बैंक की ओर खींचे चले आते थे, लेकिन बैंक के पतन की शुरुआत 26/11 के मुंबई हमले के बाद से शुरू हो गई। 26/11 के मुंबई हमले में राणा कपूर के साथ यस बैंक को शुरू करने वाले उनके दोस्त और रिश्तेदार अशोक कपूर की मौत हो गई। अशोक कपूर की मौत के बाद यस बैंक में हिस्सेदारी और पद को लेकर विवाद शुरु हो गया। अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच बैंक के मालिकाना हक को लेकर विवाद शुरू हो गया। दरअसल मधु कपूर चाहती थी कि उनकी बेटी को यस बैंक के मैनेंजमेंट बोर्ड में जगह मिले, लेकिन राणा कपूर ऐसा नहीं होने दे रहे थे, जिसकी वजह से दोनों के बीच लड़ाई शुरू हो गई। इस विवाद ने धीरे-धीरे बैंक की जड़ें खोखली करनी शुरू कर दी। हालात यह है कि आज बैंक बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है।

राणा कपूर के फैसलों की वजह से बिगड़ी स्थिति
इतना ही नहीं राणा कपूर के कई फैसले यस बैंक के लिए घातक साबित हुए। राणा कपूर ने लोन देने और उसे वसूल करने की प्रक्रिया अपने हिसाब से तय की, जो बैंक की बर्बादी की बड़ी वजह साबित हुए। राणा कपूर ने अपने निजी संबंधों के आधार पर कई लोगों को लोन बांटे। बैंक ने अनिल अंबानी ग्रुप, आईएलएंडएफएस, सीजी पावर, एस्सार पावर, रेडियस डिवेलपर्स जैसे कंपनियों को लोन बांटा। इन कंपनियों ने बैंक 6,355 करोड़ रुपए की रकम को बैड लोन में डाल दिया था।

राणा कपूर पर लगे गड़बड़ी के आरोप
राणा कपूर का नाम विवादों में रह चुका है। साल 2018 में उन पर बैंक में गड़बड़ी करने का आरोप लगा। उनके ऊपर कर्ज और बैलेंसशीट में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए,जिसके बाद उन्हें चेयरमैन के पद को छोड़ना पड़ा। आपको बता दें कि यस बैंक देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। देशभर में बैंक की 1000 से शाखाएं और 1800 एटीएम बै। बैंक का मुख्यालय मुंबई में है। बैंक महिलाओं के लिए खास Yes Grase Branch चलाती हैं, जहां सिर्फ महिला कर्मचारी हैं।
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