बॉस ने गुस्से में महिला कर्मचारी के मेनोपॉज को लेकर किया कमेंट, देना पड़ा ₹20 लाख मुआवजा
लंदन, 23 फरवरी। ऑफिस में कई बार बॉस की डांट सुनने को मिल जाती है। लेकिन जरा सोचिए कि आपका बॉस आप पर किसी बात पर चिल्ला दे जिसके लिए आपको 20 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर मिल जाएं। जी हां ब्रिटेन में एक महिला के साथ ऐसा ही हुआ जब बॉस के उसके ऊपर चिल्लाने पर उसे 20 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर मिले हैं।

बॉस ने मेनोपॉज को लेकर की थी टिप्पणी
52 वर्षीय ली बेस्ट ब्रिटेन के एसेक्स में स्थित एक पालतू जानवरों के लिए खाना बनाने वाली फर्म में काम करती थीं। मार्च 2020 में एक दिन जब वह सेल्स असिस्टेंट के तौर पर काम कर रही थीं उसी दौरान एक ऑर्डर मिक्स अप होने को लेकर उनकी अपने बॉस डेविड फ्लेचर के साथ बहस हो गई। बहस के दौरान उनके बॉस फ्लेचर ने बेस्ट को कहा कि उन्हें जरूर मेनोपॉज से गुजर रही हैं।
एम्प्लायमेंट ट्रिब्यूनल को सुनवाई के दौरान बताया गया कि जब फ्लेचर ये कमेंट कर रहे थे तो शादीशुदा ली बेस्ट ने अपने कानों पर हाथ रख लिया और कहा था 'मैं इसके बारे में नहीं सुनना चाहती।'

शिकायत पर एक महीने बाद किया बर्खास्त
जब बेस्ट ने बॉस फ्लेचर की पत्नी और पार्टनर एंड्रिया से उनकी टिप्पणी के बारे में शिकायत की उसे इधर-उधर शिकायत न करने के लिए कहा गया। इससे भी ज्यादा बुरा एक महीने बाद हुआ जब उसे बर्खास्त कर दिया गया।
52 वर्षीय ली बेस्ट अपने नियोक्ताओं के खिलाफ ट्रिब्यूनल में ले गईं और उनके ऊफर उम्र और लैंगिक भेदभाव के साथ ही गलत तरीके से बर्खास्त किए जाने को लेकर शिकायत की। पैनल ने पाया कि मिस्टर फ्लेचर की टिप्पणी एक अत्यधिक संवेदनशील विषर पर थी और एक महिला से उसके मेनोपॉज के बारे में पूछना बहुत ही खराब काम था।

पैनल ने पाया अपमानजनक टिप्पणी
पैनल को बताया गया, 'फ्लेचर ने उम्र और स्थिति के बारे में अनुचित और अपमानजनक टिप्पणी की। एक महिला के रूप में उसके मेनोपॉज को लेकर धारणा बनाना का अनुमान करना यह रूढ़िवादी लक्षण है जिसे कतई भी बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया कि फ्लेचर ने ऐसा तब भी किया जबकि बेस्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह ऐसी किसी भी तरह की बहस नहीं करना चाहती। ट्रिब्यूनल ने एक अवांछित आचरण की श्रेणी में पाया जिसका प्रभाव बेस्ट की गरिमा का उल्लंघन करना और उसके लिए अपमानजनक वातावरण बनाने का था।

20 लाख मुआवजा देने का आदेश
डेविड फ्लेचर की बेस्ट पर टिप्पणी को ट्रिब्यूनल ने बेहद आपत्तिजनक माना। साथ ही यह भी पाया कि बेस्ट को उनकी कोविड की चिंताओं को उठाने और फ्लेचर के गलत व्यवहार की शिकायत के लिए बर्खास्त कर दिया गया था। जिसके बाद ट्रिब्यूनल ने महिला को 20 हजार पाउंड (लगभग 20 लाख रुपये) मुआवजा देने का आदेश दिया।












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