दिन रात फोन स्क्रॉल करने की आदत आपको कहां ले जाएगी? जानें 'डिजिटल डिटॉक्स' से जुड़ी बातें
What is digital detox: डिजिटल डिटॉक्सिंग का मतलब टेक्नोलॉजी से खुद को दूर रखना है। वैसे तो आजकल के समय में ये टर्म काफी मुश्किल लगता है। लेकिन फिर भी एक्सपर्ट इसके लिए कुछ आसान उपाय सुझाते आए हैं।

Digital Detox: जैसे शरीर से बैड टॉक्सिन्स निकालने के लिए आपको डिटॉक्सिफिकेशन की जरूरत पड़ती है, ठीक उसी तरह दिमाग को भी डिटॉक्सिफिकेशन की जरूरत होती है। ये डिटॉक्सिफिकेशन कुछ खाने, पीने नहीं बल्कि डिजिटल डिवाइसों से दूर रहकर किया जाता है। आजकल लोग फोन, लैपटॉप और डिजिटल डिवाइसों से दूर रहने का लक्ष्य तो बनाते हैं, लेकिन इसे पूरा कर नहीं पाते। इसी मुद्दे पर बात करते हुए हम चर्चा करने जा रहे हैं डिजिटल डिटॉक्सिफिकेशन की। इस टर्म का मतलब टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से ताक पर रख देना।
क्या होता है डिजिटल डिटॉक्स?
डिजिटल डिटॉक्सिंग का मतलब चिंता को घटा कर लोगों को असली दुनिया से जोड़ना है। हालांकि, टेक्नोलॉजी से दूर रहकर होने वाले फायदों का वैज्ञानिक तौर पर कुछ सबूत नहीं मिल पाया है लेकिन फिर भी ये सबके लिए एक चुनौती बनता जा रहा है।
आजकल ये टर्म थोड़ा असंभव
पहले दौर की बात करें, तो डिजिटल डिटॉक्सिंग थोड़ा बहुत आसान भी लगता था। लेकिन अब टेक्नोलॉजी को अलग करना असंभव सा हो गया है। कोरोना महामारी की बात करें, तो हमारी जिंदगी इसके बाद से और भी ज्यादा टेक्नोलॉजी में घुस चुकी है। आज के दिन में कई लोगों के लिए डिजिटल उपकरणों से दूरी बना पाना संभव नहीं रह गया है।
टेक्नोलॉजी में बुरी तरह से बंधे लोग
ऐप के जरिये बैंकिंग करने की बात हो, या फिर रेस्तरां में मेन्यू पढ़ने की। टेक्नोलॉजी जिंदगी में बुरी तरह से घुस चुकी है। टेक्नोलॉजी के अंदर लोग इतना घुस चुके हैं कि अब डिजिटल डिटॉक्सिंग एक मुश्किल टर्म मालूम पड़ रहा है। पहले के समय में लोगों के पास घर से बाहर निकलकर एक दूसरे से मिलने-जुलने की आदत भी थी। लेकिन अब के समय में लोग फोन में ही घुसे रहते हैं।
क्या काम कर पाएगा डिजिटल डिटॉक्स?
ब्रिटेन में टिस्साइड यूनिवर्सिटी में डिजिटल एंटरप्राइज की एक सीनियर लेक्चरर सीना जोनेडी कहते हैं कि मैं टेक्नोलॉजी बंद नहीं कर सकती। हम हर वक्त किसी ना किसी कारण से स्क्रीन पर मौजूद रहते हैं। वे टेक्नोलॉजी से पूरी तरह से कटने की बजाय डिजिटल माइंडफुलनेस को आजमाते हैं। उनका कहना है कि टेक्नोलॉी का इस्तेमाल किसी उद्देश्य के लिए किया जाए, तो बढ़िया हो सकता है। इससे टेक्नोलॉजी से पूरी तरह कटने की चिंता कम होगी और किसी उद्देश्य के लिए इसके इस्तेमाल पर फोकस बढ़ेगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि जो लोग पूरी तरह से स्क्रीन से नहीं हट पाते, वे अपने टेक्नोलॉजी इस्तेमाल के पैटर्न पर गौर कर सकते हैं। ऐसा करके टेक्नोलॉजी का और भी बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि ब्रेक के तौर पर स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग करने की आदत को सुधारें। जरूरत ना हो तो फोन को खुद से दूर रखने की आदत डालें।












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