60 सालों से धधक रहा दुनिया का यह शहर, जमीन से निकल रही आग, धरती हो गई खोखली

नई दिल्ली: दुनिया में एक ऐसा शहर है, जो धीरे-धीरे दूसरे शहरों से कट चुका है। कभी जिसका इतिहास सालों पुराना था, अब बिल्कुल वीरान हो चुका है। शहर के अंदर की जमीन में आग धधक रही है, जिसकी वजह से पूरा शहर खोखला होता जा रहा है। इतना ही नहीं यहां रहने वाले लोग इस शहर को छोड़कर कहीं दूर जा बसे हैं। इस शहर का नाम है सेंट्रलिया, जो कि अमेरिका के पूर्वी तट पर बसे पेंसिल्वेनिया राज्य का एक शहर है।

भूतिया शहर में तब्दील हुआ सेंट्रलिया

भूतिया शहर में तब्दील हुआ सेंट्रलिया

कभी खदानों के लिए मशहूर रहने वाला यह शहर आज अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक आज से करीब 60 साल पहले हुई एक घटना ने इस शहर के वर्तमान और भविष्य को पूरी तरह से बदल डाला। यहां ना कोई प्राकृतिक आपदा आई, ना किसी वायरस ने तबाही मचाई बस एक घटना ने इस पूरे शहर को भूतिया शहर में तब्दील कर दिया। क्या थी वो घटना जानिए....

अंडरग्राउंड आग की चपेट में पूरा शहर

अंडरग्राउंड आग की चपेट में पूरा शहर

61 साल से सेंट्रलिया शहर अंडरग्राउंड आग की चपेट में है। यहां भूमिगत आग साल 1962 में लगी थी, जो आज तक बंद नहीं हो पाई है। यह शहर कभी खदानों का शहर था, लेकिन मई 1962 में यहां एक बड़े कचरे के ढेर में ऐसी आग लगी थी, जो धीरे-धीरे फैलते हुए जमीन से हजारों फीट नीचे कोयले के खदान तक जा पहुंची और तब से लेकर अब तक करीब 60 साल हो चुके हैं, लेकिन यह आग नहीं बुझ पाई है।

100 सालों तक नहीं बुझने वाली आग

100 सालों तक नहीं बुझने वाली आग

बताया जाता है कि आग पास के एक लैंडफिल में शुरू हुई और तेजी से शहर की सतह के नीचे कोयला खदानों में फैल गई। भले ही उस तरह की आग को बुझाना के लिए कई कोशिश की गई हो, लेकिन कोयले के ना खत्म होने वाले भंडार के कारण यह मुश्किल बना हुआ है। शहर की सड़कों पर चौड़ी-चौड़ी दरारें आ चुकी है। उन दरारों से जहरीली गैस लीक हो रही है। दावा किया जा रहा कि यह आग आने वाले 100 सालों तक बुझने वाली नहीं है।

जमीन की दरारों से निकल रही जहरीली गैस

जमीन की दरारों से निकल रही जहरीली गैस

आग को बुझाने के कई प्रयास किए गए लेकिन सभी विफल रहे और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें जमीन की दरारों से बाहर निकल रही है, जिससे यहां रहने वाले गिने चुने लोगों के लिए एक खतरनाक जगह बन चुकी है। हालांकि आग लगने के 20 साल बाद भी लोग इस शहर में रहते थे। साल 1890 में शहर में करीब 2,700 लोग रहते थे, लेकिन अब साल 2020 में सिर्फ 5 लोग ही रहते हैं। 1983 में सरकार ने हस्तक्षेप किया और अधिकांश लोगों को यहां से शिफ्ट कर दिया, साथ ही शहर के विभिन्न घरों को भी समतल कर दिया।

बस 5 लोग, घोस्ट-टाउन बनने वाला शहर

बस 5 लोग, घोस्ट-टाउन बनने वाला शहर

हालांकि कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा हानिकारक है, शेष पांच निवासियों ने कानूनी लड़ाई लड़ी और इसे शहर में रहने के लिए जीत लिया। लेकिन 2022 तक शहर अब स्थानीय यातायात से नहीं जुड़ा है, एक रिपोर्ट्स के मुताबिक इस शहर का कनेक्शन बाकी शहरों से लगभग पूरी तरह से कट गया है, जिसका मतलब है कि सेंट्रलिया अब घोस्ट-टाउन बनने की कगार पर है।

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