Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

जलवायु परिवर्तन है क्या, आसान शब्दों में समझें

धरती
BBC
धरती

मानवीय गतिविधियों और क्रिया-कलापों के कारण दुनिया का तापमान बढ़ रहा है और इससे जलवायु में होता जा रहा परिवर्तन अब मानव जीवन के हर पहलू के लिए ख़तरा बन चुका है.

अगर इस पर ग़ौर नहीं किया गया और इसे यूं ही छोड़ दिया गया तो आने वाले समय में तापमान इस क़दर बढ़ जाएगा कि मानव जीवन पर संकट आ सकता है, भयावह सूखा पड़ सकता है, समुद्री जल स्तर बढ़ सकता है और इन सब प्राकृतिक आपदाओं के फ़लस्वरूप कई प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं.

मानव समाज के आगे यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इस चुनौती से निपटने के लिए कुछ संभावित समाधान भी हैं.

जलवायु परिवर्तन
Getty Images
जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन क्या है?

जलवायु एक लंबे समय में या कुछ सालों में किसी स्थान का औसत मौसम है और जलवायु परिवर्तन उन्हीं औसत परिस्थितियों में बदलाव है.

जितनी तेज़ी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसके लिए मानव-क्रियाएं सर्वोपरि दोषी हैं. घरेलू कामों, कारखानों और परिचालन के लिए मानव तेल, गैस और कोयले का इस्तेमाल करते हैं जिसकी वजह से जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.

जलवायु परिवर्तन: भारत को दी गई डेडलाइन पर है दुनिया की नज़र

जंगल की आग, झुलसाती गर्मी और बाढ़ से डूबते शहर- दुनिया में ये क्या हो रहा है?

जब ये जीवाश्म ईंधन जलते हैं तो उनसे ग्रीनहाउस गैस निकलती हैं जिसमें सबसे अधिक मात्रा कार्बन डाइऑक्साइड की होती है. इन गैसों की सघन मौजूदगी के कारण सूर्य का ताप धरती से बाहर नहीं जा पाता है और ऐसे में ये धरती का तापमान बढ़ने का कारण बनती हैं.

19वीं सदी की तुलना में धरती का तापमान लगभग 1.2 सेल्सियस अधिक बढ़ चुका है और वातावरण में CO2 की मात्रा में भी 50% तक वृद्धि हुई है.

https://www.youtube.com/watch?v=hYoG5jg2rPA

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम जलवायु परिवर्तन के बुरे परिणामों से बचना चाहते हैं तो हमें अपने क्रिया-कलापों पर ध्यान देते हुए तापमान वृद्धि के कारकों को नियंत्रित करने के बारे में ठोस क़दम उठाने चाहिए. ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जिससे ताप वृद्धि धीमी हो.वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग को साल 2100 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बनाए रखने की ज़रूरत है.

लेकिन अगर इस संबंध में दुनिया के तमाम देशों ने कोई ठोस क़दम नहीं उठाया तो इस सदी के अंत तक धरती का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है.

अगर कोई क़दम नहीं उठाया गया तो वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ग्लोबल वार्मिंग 4 डिग्री सेल्सियस से अधिक भी हो सकती है. जिसके परिणामस्वरूप दुनिया को भयानक हीट-वेव का सामना करना पड़ सकता है, समुद्र के स्तर में बढ़ोत्तरी होने से लाखों लोग बेघर हो जाएंगे, कई पादप-जंतुओं की प्रजाति विलुप्त तक हो सकती है.

https://www.youtube.com/watch?v=C5f29hGv9Uk

जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव है?

प्राकृतिक घटनाओं में जिस तरह से एकाएक बदलाव आए हैं, वह जलवायु परिवर्तन का ही परिणाम है. तूफ़ानों की संख्या बढ़ गई है, भूकंपों की आवृत्ति बढ़ गई है, नदियों में बाढ़ का विकराल स्वरूप आदि घटनाएं पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर जीवन और जीवित रहने के माध्यमों पर पड़ रहा है.

अगर तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो कुछ क्षेत्र निर्जन हो सकते हैं और खेत रेगिस्तान में तब्दील हो सकते हैं. तापमान बढ़ने के कारण कुछ इलाक़ों में इसके उलट परिणाम भी हो सकते हैं. भारी बारिश के कारण बाढ़ आ सकती है. हाल ही में चीन, जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड्स में आई बाढ़ इसी का नतीजा है.

तापमान वृद्धि का सबसे बुरा असर ग़रीब देशों पर होगा क्योंकि उनके पास जलवायु परिवर्तन को अनुकूल बनाने के लिए पैसे नहीं.

कई विकासशील देशों में खेती और फसलों को पहले से ही बहुत गर्म जलवायु का सामना करना पड़ रहा है और ठोस क़दम के अभाव में इनकी स्थिति बदतर हो जाएगी.

ईरान में पानी के लिए कोहराम, आख़िर क्यों सूखे में समा रहा मुल्क

जलवायु परिवर्तन: आईपीसीसी की रिपोर्ट मानवता के लिए 'ख़तरे की घंटी'

महासागर और इसके जीवतंत्र पर भी ख़तरा मंडरा रहा है.

https://www.youtube.com/watch?v=OrPw5SjwQFE

उदाहरण के लिए ऑस्ट्रेलिया में ग्रेट बैरियर रीफ़ जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़े समुद्री तापमान की वजह से पहले ही अपने आधे कोरल खो चुकी है.

जंगलों में लगने वाली आग की संख्या भी बीते सालों में बढ़ी है. गर्म और शुष्क मौसम के कारण आग तेज़ी से फैलती है और इनके बार-बार लगने की भी आशंका बढ़ जाती है.

तापमान वृद्धि का एक बुरा असर यह भी होगा कि साइबेरियाई क्षेत्रों में जमी बर्फ़ भी पिघलेगी जिससे सदियों से अवशोषित ग्रीनहाउस गैसें भी मुक्त हो जाएंगी, जिसका बुरा असर होगा.

तापमान बढ़ने के कारण जीवों के लिए भोजन और पानी का संकट बढ़ जाएगा.

उदाहरण के लिए, तापमान बढ़ने से ध्रुवीय भालू मर सकते हैं क्योंकि जो बर्फ़ उनके लिए आवास है और जहां से वे अपने लिए भोजन प्राप्त करते हैं वह तेज़ी से पिघल रही है.

https://www.youtube.com/watch?v=O1wP7ooC-lw

जलवायु परिवर्तन: IPCC रिपोर्ट से हम ये 5 बातें सीख सकते हैं

जलवायु परिवर्तन पर UN की रिपोर्ट भारत के लिए कितनी गंभीर है?

इसके अलावा एक हाथी जिसे प्रतिदिन 150-300 लीटर पानी चाहिए, उसके लिए जीवन का संघर्ष बढ़ जाएगा.

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो इस सदी में कम से कम 550 प्रजातियां विलुप्त हो सकती है.

दुनिया के हर क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन का अलग असर होता है. कुछ स्थानों पर तापमान तुलनात्मक रूप से बढ़ जाएगा, कुछ जगहों पर भारी बारिश होगी और बाढ़ आएगी और कुछ इलाक़ों को सूखे की मार झेलनी होगी.

https://www.youtube.com/watch?v=FMWnPhECIMc

अगर तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर नहीं रखा गया तो...

  • अत्यधिक बारिश के कारण यूरोप और ब्रिटेन में बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं. मध्य पूर्व के देशों में भयानक गर्मी पड़ सकती है और खेत रगिस्तान में बदल सकते हैं
  • प्रशांत क्षेत्र में स्थित द्वीप डूब सकते हैं
  • कई अफ्रीक्री देशों में सूखा पड़ सकता है और भुखमरी हो सकती है
  • पश्चिमी अमेरिका में सूखा पड़ सकता है बल्कि दूसरे कई इलाक़ों में तूफ़ान की आवृति बढ़ सकती है
  • ऑस्ट्रेलिया भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल सकता है

धरती के तापमान को नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय यह है कि दुनियाभर के देश इस मुद्दे पर एकसाथ आएं. साल 2015 में हुए पेरिस समझौते के तहत दुनिया के तमाम देशों ने कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने का प्रण लिया था ताकि ग्लोबल वॉर्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर ना जाने दिया जाए.

दोगुने हो गए हैं भीषण गर्मी वाले दिन

जलवायु परिवर्तन: भारत को दी गई डेडलाइन पर है दुनिया की नज़र

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा और समाधान खोजने के लिए ब्रिटेन नवंबर महीने में विश्व के नेताओं के एक शिखर सम्मेलन का आयोजन करने वाला है. जिसे COP26 नाम दिया गया है. जहां दुनिया भर के देश साल 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के अपनी योजनाओं पर चर्चा करेंगे.

कई देशों ने साल 2050 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य रखा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है लेकिन इसके लिए दुनिया भर की सरकारों, उद्यमों और प्रत्येक शख़्स को अपने स्तर पर बदलाव के लिए प्रयास करने होंगे.

https://www.facebook.com/watch/?v=395763061683109

निजी स्तर पर आप क्या कर सकते हैं-

सरकार को अपने स्तर पर बड़े और नीति-परक बदलाव करने की ज़रूरत है लेकिन बतौर जिम्मेदार नागरिक हम अपने स्तर पर भी इस प्रयास का हिस्सा बन सकते हैं. हमारे छोटे-छोटे प्रयास जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं. जैसे -

  • विमान सेवा का कम इस्तेमाल
  • कार का उपयोग ना करें या फिर करें तो इलेक्ट्रिक कार का
  • ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करें

भारत कोयले के बिना क्यों नहीं रह सकता है?

जलवायु परिवर्तन को समझने में मदद करनेवाले वैज्ञानिकों को मिला नोबेल

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+