ट्राउजर्स जो आपको बना देगी स्पाइडरमैन

1993 में आई वैलेस और ग्रॉमिट की फिल्म "दि रौंग ट्राउजर्स" की कहानी कुछ ऐसी थी, जिसमें ग्रॉमिट के हाथों एक ऐसा ट्राउजर्स लग जाता है , जिसकी मदद से वैलेस दीवारों और छतों पर चलने में सक्षम हो जाता है। लिहाजा, लंदन के लीसेस्टर विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी इस तकनीक को संभव करने की ठानी है। उन्होंने पाया है कि थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन यह तकनीक संभव है।
लीसेस्टर विश्वविद्यालय के चौथे वर्ष में पढ़ने वाले फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी के छात्रों ने इस अजूबे के पीछे की तकनीक का पता लगाया और पाया कि इसके लिए ट्राउजर्स का बूट्स के साथ संपर्क होना जरूरी है। अगर बूट्स में फिट किया वैक्यूम जेनरेटर व्यक्ति के अनुसार शक्तिशाली या पॉवरफुल हो, तो यह संभव है कि लोग दुनिया को उल्टे नजरों से भी देख पाएगें। और बूट्स के साथ जुड़े ट्राउजर्स को पहन कर छतों और दीवारों पर चल सकेंगे।
लिहाजा, सीधी नजरों से दुनिया देख कर बोर होने वालों के लिए लंदन के लीसेस्टर विश्वविद्यालय के छात्रों की ओर से यह एक नायाब तोहफा होगा। साथ ही हो सकता है लोगों के पास यह एक नए ऑप्शन के तौर पर उभर कर आ जाए।
तो जनाब, चौकेन्ने रहिए, हो सकता है कल को सड़कों और फ्लाइओवर के साथ आपको दीवारों पर चलते लोग भी दिख जाएं।












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