हौसले को सलाम: हाथ नहीं कर रहे काम इसलिए पैर से दे रही है बोर्ड परीक्षा
पोलियो की वजह से अंकिता के दोनों हाथ बेकार हो चुके है, लेकिन हाथ न होने की वजह से उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने पैर को ही अपना हाथ बना लिया और अब पैर से लिखकर बोर्ड परीक्षा दे रही है।
पटना। परीक्षा का नाम सुनकर छात्रों के हाथ पैर फूलने लग जाते है। परीक्षा अगर 10वीं या 12वीं की हो तो तेज से तेज विद्यार्थियों की भी हालत खराब हो जाती है, लेकिन बिहार बोर्ड से 10वीं की परीक्षा दे रही अंकिता कुमार ने अपने हौसले से सबकों चौंका दिया है। अंकिता सामान्य छात्रा नहीं है। वो बाकियों की तरह फटाफट उत्तरपुस्तिका में नहीं लिख सकती, क्योंकि वो हाथ से नहीं बल्कि पैर से लिखती है।

बिहार के सारण जिले में बनियापुर की रहने वाली अंकिता अपनी 10वीं बोर्ड की कॉपियां हाथों से नहीं बल्कि पैर से लिखती है। अंकिता जब 5 साल की थी तभी उसे पोलियो हो गया था, जिसके बाद उसके दोनों हाथों ने काम करना बंद कर दिया था। बाद में अंकिता की आवाज भी चली गई., मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। अंकिता ने पढ़ाई को ही अपनी ताकत बनाने की सोची और आज 10वीं की परीक्षा दे रही है। अंकिता अपनी दादी के साथ गांधी हाईस्कूल एक्जाम सेंटर पर जाती हैं। बेंच पर बैठकर लिखने में तकलीफ होगी, इसलिए वो वहां दरी पर बैठकर पैर के पंजे की उंगलियों में पेन फंसा कर अपनी उत्तरपुस्तिका लिखती है।
अंकिता की लेखनी से उसके टीचर काफी आकर्षित है। उसकी क्लास टीचर के मुताबिक अंकिता पढ़ने में काफी होशियार है और सबका साथ उसे मिला तो वो एक दिन जरूर नाम रौशन करेगी। एग्जाम सेंटर पर परीक्षक उसकी सुंदर हैंडराइटिंग देखकर दंग रह जाते है। उनका कहना है कि अंकिता पैर से जितना सुंदर लिख लेती है, कई छात्र अपने हाथों से भी उतनी सुंदर लेखनी नहीं लिख सकते। अंकिता के इस हौंसले को देखकर सब उसे सलाम करते है। अंकिता की दादी चाहती है कि उनकी पोती एक दिन अफसर बने और अपना नाम रौशन करे।












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