64 साल पहले 'मृत' घोषित की जा चुकी टेम्स नदी में मिला 'जीवन', खतरनाक शार्क समेत जिंदा मिले कई प्राणी

लंदन, 12 नवंबर। लंदन की टेम्स नदी को दुनिया की मृत नदी कहा जाता है, इसका कारण यह है कि 1957 में इसे मृत घोषित कर दिया गया था। मृत यानी की टेम्स नदी के पानी में कोई भी जीव नहीं पाया जाता था। हालांकि अब यह रिपोर्ट बदलने का समय आ गया है। करीब 64 साल पहले मृत घोषित की जा चुकी टेम्स नदी अब जीवित हो गई है। जूलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन के नेतृत्व में हुए अध्ययन के मुताबिक टेम्स नदी में शार्क्स, समुद्री घोड़े और सील्स जीवित मिले हैं।

मृत घोषित नदी में मिला जीवन

मृत घोषित नदी में मिला जीवन

शोधकर्ता इसे अच्छी खबर मान रहे हैं क्योंकि सालों पहले नदी को 'जैविक रूप से मृत' घोषित कर दिया गया था। लेकिन अब लंदन की मशहूर नदी टेम्स अब सीहॉर्स, ईल, सील और शार्क का घर है। अध्ययन में कहा गया है कि कुल मिलाकर प्रकृति के लिए यह फायदेमंद है। हालांकि, टेम्स के ज्वारीय क्षेत्र में मिलने वालीं मछलियों की कई प्रजातियों में कमी देखी गई है। अध्ययन में पता चला कि करीब 346 किलोमीटर लंबी नदी में तीन प्रकार की शार्क रहती हैं।

1950 के दशक से लगातार रखी जा रही नजर

1950 के दशक से लगातार रखी जा रही नजर

इसके अलावा मछली की 115 प्रजातियों के साथ-साथ स्मूथ-हाउंड और स्परडॉग शार्क और वन्य जीवन भी नदी में फल-फूल रहे हैं। जेडएसएल ने अपनी स्टेट ऑफ थेम्स रिपोर्ट में कहा, 'आज नदी लंदन जैसे ही विविध वन्यजीवों के लिए एक संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र है।' बता दें कि नदी पर 1950 के दशक से लेकर आज तक टेम्स नदी पर शोध के द्वारा व्यापक नजर रखी जा रही है। जेडएसएल ने साल 2020 में 'ग्रेटर टेम्स शार्क प्रोजेक्ट' लॉन्च किया था।

नदी में पाई गई 'जहरीली शार्क'

नदी में पाई गई 'जहरीली शार्क'

ये प्रोजेक्ट नदी के बाहरी मुहाना में रहने वाली लुप्तप्राय शार्क प्रजातियों पर डेटा एकत्र करने के लिए शुरू किया गया था। 'टोपे शार्क' छह फीट से अधिक लंबी हो सकती हैं और 50 से अधिक वर्षों तक जीवित रह सकती हैं। संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN रेड लिस्ट के अनुसार टोपे शार्क को दुनियाभर में गंभीर रूप से लुप्तप्राय जीव की कैटेगरी में रखा गया है। वहीं, स्परडॉग शार्क को 'जहरीली शार्क' भी कहा जाता है।

हर साल 0.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा नदी का तापमान

हर साल 0.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा नदी का तापमान

गहरे पानी में पायी जाने वाली ये शार्क अपने शरीर से एक जहरीला पदार्थ छोड़ती है जिसके संपर्क में आने से मनुष्यों में दर्द और सूजन पैदा हो सकती है। टेम्स अपने आसपास रहने वाले समुदायों के लिए नदीं एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह उन्हें पीने के पानी, खाना और तटीय बाढ़ से सुरक्षा भी प्रदान करती है। टेम्स में जीव-जंतुओं के आने से वैज्ञानिक खुश हैं लेकिन उन्होंने कहा कि टेम्स को जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टेम्स का तापमान हर साल औसतन 0.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है।

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