नासा ने तेज किया एलियंस की खोज का प्रोग्राम, संपर्क स्थापित करने के लिए ले रहा 'पुजारी और पादरियों' की मदद
नई दिल्ली, 24 दिसंबर: दशकों से कई देशों की स्पेस एजेंसियां दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज कर रहीं, लेकिन अभी किसी को कामयाबी नहीं मिली। अब नासा ने एक नया प्लान तैयार किया है, जिसके तहत सभी धर्मों के विद्वानों की भर्ती की जा रही है। इसका मकसद एलियंस की खोज में उनकी मदद लेना और उनसे संवाद स्थापित करना है। नासा का ये नया प्रयोग कितना कारगर होगा, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

अंतरिक्ष में नहीं भेजेगा
वैसे अगर आप सोच रहे कि इन धर्म के विद्वानों जैसे-पुजारी, पादरी आदि को नासा अंतरिक्ष में भेजेगा, तो आप गलत हैं। नासा की योजना ये पता लगाने की है कि दुनिया के विभिन्न धर्म अलौकिक जीवन के बारे में कैसे रिएक्ट करेंगे। अभी तक 24 धर्मशास्त्रियों की मदद ली जा रही है।

ब्रिटिश पादरी भी शामिल
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक नासा ने ब्रिटिश पादरी डॉक्टर एंड्रयू डेविसन को भी चुना है। वो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के धर्मशास्त्री हैं। उन्होंने जैव रसायन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एक धर्मशास्त्री वो होते हैं, जो ईश्वर की प्रकृति, धर्म और धार्मिक विश्वासों का अध्ययन करते हैं। अब नासा की ओर से उनकी नियुक्ति इस बात का सबूत है कि वो एलियंस खोजने की दिशा में तेजी से प्रयास कर रहे हैं।

दूसरे ग्रह पर जीवन की संभावना ज्यादा
मामले में डॉ. डेविसन ने कहा कि इस दुनिया से बाहर जीवन खोजने की संभावना अधिक से अधिक होती जा रही है। उन्होंने इससे संबंधित एक किताब भी लिखी है, जिसका नाम एस्ट्रोबायोलॉजी एंड क्रिश्चियन डॉक्ट्रिन है। उसमें ये सवाल पूछा गया है कि क्या ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन की संभावना है।

प्रवाहों पर पहले से हो विचार
वहीं एलियंस के विषय में नासा के एस्ट्रोबायोलॉजी इंस्टीट्यूट के पूर्व प्रमुख कार्ल पिल्चर कहते हैं कि पृथ्वी पर हजारों साल से जीवन है। हमारे ग्रह के अलावा भी 100 अरब आकाशगंगा और 100 अरब से ज्यादा तारे हैं। कार्ल का मानना है कि जब भी दूसरे ग्रह पर जीवन मिले, तो इसके प्रभावों पर पहले विचार किया गया है।












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