नासा ने कैप्चर की मरते हुए तारे की अद्भुद तस्वीर, 300 साल पहले हुआ था सुपरनोवा विस्फोट
नई दिल्ली, अगस्त 03: ब्रह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है। वैज्ञानिक हर बार कोई नया और रोमांचक खोजकर लाते हैं। नासा वेधशालाएं विशाल ब्रह्मांड और उसके द्वारा प्रदर्शित सभी अद्भुत घटनाओं को रिकॉर्ड करती रहती हैं। साइंटिस्टों ने इस बार भी कुछ ऐसा खोजा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। ऐसी ही एक खूबसूरत तस्वीर नासा के इंस्टाग्राम पोस्ट में सोमवार को पोस्ट की है। तस्वीर लगभग 300 साल पहले हुए एक सुपरनोवा(मरता हुआ तारा) के दौरान रंगीन रोशनी का एक संयोजन है, लेकिन नासा वेधशालाओं ने 2003-04 में इसके प्रकाश को पकड़ा था।

मरने वाला तारा हमारे सौर मंडल से लगभग 11,000 प्रकाश वर्ष दूर
नासा ने इस सुपरनोवा का नाम Cassiopeia A दिया है। जो एक सुपरनोवा विस्फोट का 300 साल पुराना अवशेष है। मरने वाला तारा हमारे सौर मंडल से लगभग 11,000 प्रकाश वर्ष दूर है। नासा के मुताबिक जिस विस्फोट के बाद यह सुपरनोवा हुआ होगा, उसकी रोशनी धरती पर 350 साल पहले दिखाई दी होगी जबकि इस रोशनी को हम तक पहुंचने में 11 हजार साल लगे होंगे। ये तस्वीर रेड स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप से कैप्चर की गई है।
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नासा ने तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की
नासा ने जो तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की है, इसे तीन अलग-अलग ऑब्जर्वेटरीज से लिया गया है और इसमें मौजूद रंग इसके बारे में अलग चीजें बताते हैं। लाल रंग इन्फ्रारेड डेटा से लिया गया है जिसे स्पिट्जर स्पेस टेलिस्कोप से डिटेक्ट किया गया था। इसमें बाहरी शेल की गर्म धूल दिखती है जिसका तापमान 10 डिग्री सेल्सियस है। पीला रंग ऑप्टिकल डेटा का है जिसे नासा के हब्बल स्पेस टेलिस्कोप ने लिया है। इसमें गर्म गैसों के फिलामिंट दिखते हैं जिनका तापमान 10 हजार डिग्री सेल्सियस है।

'काश यह रात के आसमान में दिखाई देता'
वहीं, हरा और नीला रंग एक्स-रे डेटा से बना है जिसे चंद्र एक्सरे ऑब्जर्वेटरी ने लिया है। इसमें 1 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान पर गैसें दिख रही हैं। नासा के मुताबिक ये गर्म गैसें तब बनी थीं जब सुपरनोवा से निकला मटीरियल आसपास की गैस और धूल से 1 करोड़ मील प्रतिघंटे की रफ्तार पर टकराता है। नासा की इस तस्वीर पर लोग भी कमेंट कर रहे हैं। एक य़ूजर ने लिखा कि, काश यह रात के आसमान में दिखाई देता। यह अब तक की सबसे शानदार तस्वीर है।

क्या है सुपरनोवा
जब अंतरिक्ष में कोई तारा टूटता है तो एक ऊर्जा पैदा होती है, इसी ऊर्जा को सुपरनोवा कहा जाता है। यह किसी तारे का आखिरी समय होता है, इसके बाद तारे का जीवन समाप्त हो जाता है। हमारी आकाशगंगा में सुपरनोवा देख पाना थोड़ा मुश्किल है। क्योंकि अपनी आकाशगंगा धूल से भरी हुई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सुपरनोवा से निकलने वाला प्रकाश इतना तेज होता है कि धरती से आधे ब्रह्मांड को देखा जा सकता है। इन सुपरनोवा से निकली ऊर्जा इतनी तेज होती है कि इसके सामने सूरज की चमक भी फीकी पड़ जाती है।

पिछले साल भी ऐसा ही मामला सामने आया था
हाल ही में नासा ने अंतरिक्ष में एक जोरदार विस्फोट को रिकॉर्ड किया था। तारे में ये धमाका धरती से लगभग सात करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित एसएन 2018जीवी सुपरनोवा में रिकॉर्ड किया गया है। यह सुपरनोवा एनजीसी 2525 गैलेक्सी में स्थित है। एसएन 2018जीवी सुपरनोवा की खोज पहली बार जापान के एक शौकिया खगोल वैज्ञानी कोइची इतागाकी ने की थी। पिछले एक साल से नासा इस पर नजर रख रहा था। नासा ने बताया कि इस विस्फोट में सूरज से पांच अरब गुना ज्यादा चमक देखी गई है।












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