ये कैसा काम है! रोजाना चूहों को मारकर उनकी पूंछ अलग करता है शख्स, एक साल में 7000 पूंछ कर चुका है इकट्ठा

अनवर हुसैन को लोग रैट अनवर के नाम से भी जानते हैं। वे चूहों को मारकर उनकी पूंछ इकट्ठा करते हैं। एक साल में अनवर ने 7000 चूहों को मारकर उनकी पूंछ इकट्ठा कल ही है।

Credit: BBC Hindi

चूहा एक ऐसा जानवर है, जो कई तरीकों से लोगों को नुकसान पहुंचाता है। फिर चाहे अनाज की बर्बादी हो या फिर कपड़ों की। इसलिए लोग चूहों को भगाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। लेकिन बांग्लादेश निवासी एक शख्स ने चूहे पकड़ने के अपने शौक को पेशा ही बना लिया है। बचपन में चूहे के बिल से अनाज इकट्ठा करने वाले मोहम्मद अनवर हुसैन ने मजबूरन उन्हें पकड़ने का काम शुरू किया था। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे अपना पेशा ही बना लिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि मोहम्मद चूहों को मारकर उन्हें खाते नहीं हैं ना ही किसी और काम में लाते हैं। बल्कि वे उनकी पूंछ इकट्ठी करते हैं। आइये जानते हैं कि वे ये अजीबोगरीब काम क्यों करते हैं...

30 साल से कर रहे चूहे पकड़ने का काम

30 साल से कर रहे चूहे पकड़ने का काम

मोहम्मद अनवर हुसैन बांग्लादेश में रहते हैं। 'बीबीसी हिंदी' के मुताबिक, 30 साल से वे चूहे पकड़ने का काम कर रहे हैं। उन्हें लोग रैट अनवर के नाम से जानते हैं। बचपन से खेतों में जाकर वे धान इकट्ठा करते थे। अपनी गायों को वे खेतों पर छोड़ देते थे। इकट्ठा किए हुए धान से वे मोरी मुआ खाते थे। ये खाकर उन्हें बहुत अच्छा लगता था।

कैसे शुरू किया चूहे पकड़ना

कैसे शुरू किया चूहे पकड़ना

एक दिन अनवर ने एक चूहे का बिल देखा और फावड़ा लेकर उसे खोदने लगे। बिल से चूहे को निकाला तो उससे अनवर को बहुत सारा धान मिला। उस धान से उनके चार दिनों का गुजारा हो गया। इसी लालच ने उन्हें चूहा पकड़ने वाला बना दिया। इसके बाद अनवर के घर के पास रहने वाले कृषि अधिकारी ने एक दिन अनवर से पूछा कि क्या तुम बिल खोदकर इन चूहों को मार देते हो? तो अनवर बोले कि हां, क्योंकि वे मेरे किसी भी काम के नहीं।

धीरे-धीरे जमा करने लगे चूहे की पूंछ

धीरे-धीरे जमा करने लगे चूहे की पूंछ

इसके बाद अधिकारी ने कहा कि कल से तुम ऐसा नहीं करोगे। तुम चूहों को मारकर उनकी पूंछ मेरे पास लाना। हम तुम्हें गेहूं देंगे। सरकार ने ऐसा करने के लिए बजट भी दिया है। जो सबसे ज्यादा चूहे मारेगा, उसे गेहूं मिलेगा। चूहे की हर एक पूंछ के लिए आधा किलो गेहूं दिया जाएगा। इसके बाद अनवर 1 हफ्ते तक चूहे मारकर उनकी पूंछ जमा करने लगे। 6 महीने के बाद साल में जब बजट आया, तो अनवर को 1 या आधा टन गेहूं दिया गया।

इकट्ठा की 7 हजार पूंछ

इकट्ठा की 7 हजार पूंछ

अनवर बताते हैं कि कभी-कभार चूहे पकड़ने में देरी भी हो जाती है, लेकिन सबको पता है कि देरी भले ही हो, लेकिन चूहे तो पकड़े जाएंगे ही। तो मुझे दो या पांच किलो चावल ही मिलते हैं। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं इसलिए करता हूं क्योंकि ये काम मुझे पसंद है। वीडियो में अनवर दिखा रहे हैं कि उनके पास रखे कट्टे में करीब 7 हजार चूहों की पूंछ हैं। मैंने उन्हें एक साल में मारा है।

अनवर को मिले कई अवॉर्ड्स

अनवर को मिले कई अवॉर्ड्स

अनवर बताते हैं कि इस तरह हर साल चूहे मार-मारकर वे इनकी पूंछ काट देते हैं और कृषि कार्यालय को सौंप देते हैं। इसके बाद उन्हें ईनाम मिलता है। अनवर को चूहे मारने और फसलों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय सम्मान भी मिला है। साल 2001 से 2022 के बीच में अनवर को कई अवॉर्ड्स मिल चुके हैं। बताते चलें कि बांग्लादेश में करोड़ों की फसलें, फल और फर्नीचर हर साल चूहों की वजह से बर्बाद हो जाते हैं। ऐसे में वाकई अनवर भले ही अपने शौक के लिए ये काम करते हों, लेकिन इस काम से वे कई फसलों को बर्बाद होने से बचा रहे हैं।

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