भारत की वो जगहें जहां मां-बाप बेटियों से करवाते हैं वेश्यावृत्ति
नई दिल्ली। वेश्यावृत्ति एक ऐसा व्यवसाय है जो काफी प्राचीन समय से चला आ रहा है। इतिहास के पन्नों में ऐसी कई कहानियां मिल जायेंगी जिसमें राजाओं के दरबार में वेश्याओं की संख्या का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। लेकिन अब समय बदलने के साथ इस व्यवसाय ने नया रूप ले लिया है। भारत में अभी भी यह व्यवसाय पर्दे के पीछे काफी जोरों-शोरों से चल रहा है। [यहां खर्च निकालने के लिए छात्रायें बन रही सेक्स वर्कर]
वेश्यावृत्ति में आने वाली महिलायें ज्यादातर पारिवारिक या सामाजिक मजबूरियों के चलते आती हैं। भारत में गरीबी इस व्यवसाय के पीछे की सबसे बड़ी वजह है जहां बिना मर्जी के भी महिलायें अपना घर चलाने के लिए इस धंधे को मजबूरन अपनाती हैं।
आज हम आपको भारत के इस काले सच से रूबरू करायेंगे जहा वेश्यावृत्ति अब एक पारंपरिक व्यवसाय बन गयी है। देश के इन मुख्य जगहों पर वेश्यावृत्ति ही घर चलाने और कमाई का सबसे बड़ा जरिया है।
उत्तर प्रदेश का नातपुरवा गांव
यूपी के नातपुरवा गांव में वेश्यावृत्ति यहां के लोगों का सदियों से चला आ रहा मुख्य व्यवसाय है। यहां रहने वाले नात जाति के लोग इस व्यवसाय में 400 साल से भी अधिक समय से लिप्त हैं। यहां इस जाति के लोगों की कुल आबादी 5000 है। इस गांव में रहने वाले बच्चे अपनी मां के साथ रहते हैं और मुश्किल से ही इन्हें अपने पिता के बारे में जानकारी होती है।
कर्नाटक के देवदासीस इलाका
कर्नाटक के देवदासिस में लड़कियों के कौमार्य की नीलामी होती है। इसके बाद लड़कियां अपना पूरा जीवन एक वेश्या के रूप में व्यतीत करती हैं और अपने परिवार के लिए पैसे कमाती हैं। देवदासिस हिंदू देवी येलम्मा की पूजा करते हैं, देवदासीस का मतलब होता है भगवान के गुलाम। यहां की परंपरा के अनुसार लड़कियों का विवाह देवी से होता है जिसके बाद वह अपना पूरा जीवन धर्म को समर्पित करते हैं।
गुजरात का वाडिया गांव
गुजरात के गांव वाडिया में परंपरा के अनुसार यहां के पुरुष ही महिलाओं के लिए ग्राहकों की तलाश करते हैं। यहां यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और परिवार के भरण-पोषण के लिए वेश्वयावृत्ति मुख्य व्यवसाय है।
मध्य प्रदेश का बछरा इलाका
मध्य प्रदेश के बछरा जोकि आदिवासी इलाका है यहां की परंपरा और निराली है। यहां परिवार की सबसे बड़ी लड़की को परिवार के पुरुष वेश्यावृत्ति के व्यवसाय में भेजते हैं, जिससे परिवार का भरण-पोषण होता है। यही नहीं यहां परिवार में पिता और भाई ही ग्राहक से पैसों का लेनदेन करते हैं।













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