मिस्र के राजा की ममी के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा, अंतरिक्ष से आया था उसका खंजर
काहिरा, 1 मार्च। प्राचीन मिस्र के महान फिरौन में सबसे ज्यादा चर्चित नाम रहा तूतनखामन शोधकर्ताओं और पुरातत्वविदों के लिए तूतनखामन अध्ययन का एक रोचक विषय रहा है। तूतनखामन की कब्र के साथ मिली चीजों के बारे में पुरातत्वविद जितना रिसर्च कर रहे हैं उतना ही उन्हें चौंकाने वाली जानकारी मिलती रही है। तूतनखामन के तमाम रहस्यों में सबसे ज्यादा चर्चित उनकी ममी के साथ मिला उनका खंजर भी रहा है जिसे अब वैज्ञानिकों ने सुलझा लेने का दावा किया है। शोधकर्ताओं ने इस खंजर के दूसरी दुनिया से आने का दावा किया है।

100 साल पहले मिली थी तूतनखामन की कब्र
तूतनखामन प्राचीन मिस्र का फिरौन (मिस्र के राजाओं की पदवी) था। 1922 में पुरातत्वविदों ने किंग्स वैली में बड़े पैमाने पर मिस्र के इन फिरौन के मकबरे खोजे थे। इनमें ही तूतनखामन का मकबरा था जिनमें उसकी ममी बहुत ही सुरक्षित हालत में मिली थी। मकबरे की खोज के बाद वहां पर पुरातत्वविदों ने उत्खनन अभियान चलाया। तूतनखामन की कब्र में जो दुर्लभ चीजें मिली थीं उनमें एक लोहे का खंजर भी शामिल था।
विशेषज्ञों का मानना है कि किंग तूतनखामन की मौत 19 साल की आयु में हुई थी। उन्हें एनीमिया नामक बीमारी थी हालांकि उनकी मौत कैसे हुई यह आज भी रहस्य बना हुआ है।

दाहिनी जांघ पर मिला था खंजर
पुरातत्वविदों की टीम को तूतनखामन की ममी की जांच के दौरान उसकी दाहिनी जांघ पर हथियार बंधा मिला था जो एक लोहे का खंजर था। यह खंजर भी कोई साधारण खंजर नहीं था। लोहे के इस खंजर को लोहे के म्यान में रखा गया था जिस पर लिली, पंख और सियार के सिर के पैटर्न से सजावट की गई थी। वहीं तूतनखामन के पेट पर एक और सोने का चाकू मिला था।
खोज के बाद से ही तूतनखामन का खंजर शोधकर्ताओं के लिए इतिहास के सबसे अनसुलझे रहस्यों में रहा है। पुरातत्वविद इस खंजर की उत्पत्ति और इसके निर्माण के तरीके के बारे में खोजने के लिए अध्ययन कर रहे हैं।

अंतरिक्ष से आई सामग्री से बना
अब शोधकर्ताओं की एक टीम ने खंजर में इस्तेमाल सामग्री के अध्ययन के बाद दावा किया है कि यह अंतरिक्ष से आई हो सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि खंजर में जिस सामग्री का उपयोग हुआ है उस तरह की सामग्री मिस्र के लोगों ने तूतनखामन की मौत के 500 साल बाद तक इस्तेमाल नहीं किया था। इससे उन्हें विश्वास होता है कि खंजर में इस्तेमाल की गई सामग्री धरती की नहीं थी।

रासायनिक संरचना के आधार पर दावा
वैज्ञानिकों को अध्ययन के दौरान खंजर में प्रयुक्त सामग्री की रासायनिक संरचना से ये संकेत मिला कि इसमें इस्तेमाल किया गया इस खंजर को किसी ऐसे उल्कापिंड की सामग्री की मदद से तैयार किया गया था जो पृथ्वी पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस अध्ययन को मेटेरियाटिक्स और प्लैनेटरी साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।












Click it and Unblock the Notifications