क्या मौसम को कंट्रोल कर रहा सरकारी संगठन? अजीबो-गरीब बारिश के बाद किया गया दावा
नई दिल्ली: कहते हैं मौसम पर किसी का बस नहीं चलता, लेकिन अब एक अजीबो-गरीब थ्योरी की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। दावा किया जा रहा है कि एक सरकारी संगठन मौसम को नियंत्रित कर रहा है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया की एक घटना का जिक्र भी किया जा रहा, लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो इस थ्योरी को खारिज कर इसे महज एक संयोग बता रहे हैं। (फोटो-सांकेतिक)

अजीबोगरीब बरसात हुई
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में मौसम निगरानी ऐप में एक अजीब गड़बड़ देखी गई। जिसके बाद षड्यंत्र सिद्धांतकारों ने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया। उन्होंने दावा किया कि एक सरकारी संगठन मौसम को नियंत्रित कर रहा है। दावे में ये भी कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया के बैरन्सडेल में अजीबोगरीब बरसात हुई, जिसको देखकर लोगों को लगा कि ये मानव निर्मित है।

इस पर लगा आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक गड़बड़ी का जिम्मेदार हाई-फ्रीक्वेंसी एक्टिव ऑरोरल रिसर्च प्रोग्राम (HAARP) को बताया जा रहा है। उसी की वजह से मौसम में अजीब स्थिति बनी। HAARP एक वैज्ञानिक प्रोजेक्ट है, जिसकी मदद से जटिल उपग्रहों और एंटेना की सीरीज का उपयोग पृथ्वी के वातावरण का अध्ययन करने के लिए किया जाता है।

2021 में आई थी रिपोर्ट
वहीं दूसरी ओर एक जलवायु फीडबैक रिपोर्ट 2021 में साजिश के सिद्धांतों का खंडन करने के प्रयास में जारी की गई थी। जिसमें कहा गया था कि HAARP मौसम में हेरफेर करने की इसकी क्षमता और आपदाओं का कारण बनती है। यहां तक की ये इंसानों के विचार को भी प्रभावित करती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ये सुविधा एक उच्च आवृत्ति (शॉर्टवेव रेडियो) ट्रांसमीटर है और कम आवृत्ति कंपन प्रसारित नहीं करती।

कुछ लोग दे रहे सफाई
HAARP के समर्थकों का कहना है कि उनका सिस्टम वातावरण के सबसे ऊपरी भाग (आयनोस्फीयर) में भौतिकी की घटनाओं का विश्लेषण करता है। साथ ही ट्रांसमीटर द्वारा पैदा किए जाने वाले छोटे प्रभावों का अध्ययन करता है, ये सब कुछ सेकेंड तक ही रहता है। ऐसे में ये किसी भी तरह से मौसम में परिवर्तन नहीं कर सकता। हालांकि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा कि मौसम की रीडिंग में HAARP के हस्तक्षेप के कई सबूत हैं।












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