81 साल बाद लाइब्रेरी को लौटाई किताब, पढ़े मात्र 17 पेज, आखिरी पेज पर लिखा चौंकाने वाला नोट
अमेरिका में एक ऐसा मामला सामने आया है। जहां एक शख्स ने 81 साल बाद लाइब्रेरी को किताब वापस की। वाशिंगटन की एक लाइब्रेरी को हाल ही में एक किताब मिली। जो बहुत लंबे समय से जमा नहीं की गई थी।
सोचिए आप किसी लाइब्रेरी से कोई बुक पढ़ने के लिए लेते हैं तो उसे एक सप्ताह, 20 दिन या फिर एक महीना वापस कर देते हैं। बुक लेट होने पर फाइन भी लगता है। लेकिन अमेरिका में एक ऐसा मामला सामने आया है। जहां एक शख्स ने 81 साल बाद लाइब्रेरी को किताब वापस की।
पश्चिमी वाशिंगटन की एक लाइब्रेरी को हाल ही में एक किताब मिली। जो बहुत लंबे समय से जमा नहीं की गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के समय इस किताब के लाइब्रेरी से लिया गया था। जिसके बाद से किताब वापस लाइब्रेरी नहीं लौटी।

ब्रैड बिटर ने सोमवार को एबरडीन टिम्बरलैंड लाइब्रेरी को चार्ल्स नॉर्डहॉफ और जेम्स नॉर्मन हॉल की किताब "द बाउंटी ट्रिलॉजी" की कॉपी वापस की। यह किताब 30 मार्च 1942 को एबरडीन टिम्बरलैंड लाइब्रेरी से इश्यू करवाई गई थी।
81 साल बाद वापस लाइब्रेरी पहुंची ये किताब वाशिंगटन के ओलंपिया में रहने वाले बिटर के गैराज में कई सालों से पड़ी हुई थी। हैरानी की बात यह है कि, जिस शख्स ने 81 साल पहले इस किताब को इश्यू कराया था, उसने सिर्फ 17 पन्ने ही पढ़े थे। बिटर ने बताया कि, मैं उस व्यक्ति को नहीं जानता हूं जिसने 81 साल पहले किताब को इश्यू कराया था। वाशिंगटन में उसके परिवार के बंद हो चुके स्टोर में ये किताब कोई छोड़ गया था।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, बिटर ऐतिहासिक कलाकृतियों को इकट्ठा करने का शौक रखते हैं। इसी दौरान उन्हें यह बुक मिली। जो 1932 में प्रकाशित हुई थी। पुराने सामने के बीच उन्हें ये किताब मिली। मैंने सोचा शायद लाइब्रेरी को इस किताब को वापस लेने में दिलचस्पी ना हो। लेकिन जब उन्होंने किताब लौटाई तो पुस्तकालय सन्न रह गया।
बुक को वापस पाने के बाद लाइब्रेरी के अधिकारियों ने जुर्माने का हिसाब लगाया की इस बुक की लेट फीस हजारों रुपए हो चुकी थी। लाइब्रेरी ने 1942 के रेट के हिसाब से रविवार और अन्य छुट्टियों को छोड़कर हर दिन के 2 सेंट के हिसाब से अब तक का कुल जुर्माना $484 (लगभग 40 हजार रुपये) बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि, इस किताब पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। क्योंकि कोविड19 महामारी के दौरान लेट फीस को पूरी तरह खत्म कर दिया था।
वहीं इस किताब के इश्यू कराने वाले शख्स ने बुक के अंदर एक रिव्यू नोट भी छोड़ा है। जिसमें उसने लिखा कि, यदि मुझे पैसे भी दिए जाते तो भी मैं इस किताब को नहीं पढ़ता। इस किताब की फिलहाल कीमत 99 हजार रुपए (1200 डॉलर) है। किताब ब्रिटिश रॉयल नेवी पोत एचएमएस बाउंटी पर हुए विद्रोह की घटनाओं पर आधारित है।
फोटो क्रेडिट: timberlandlibrary
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