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जन्म से ही दो टुकड़ों में बंटा है इस बच्चे का सिर, खोपड़ी में पड़ी है 4 इंच लंबी दरार

बच्चे की खोपड़ी दो टुकड़ों में बंटी है। जो कोई भी उसे देखता है डर का भाग जाता है। उसके सिर में 4 इंच लंबी दरार है।

नई दिल्ली। कहते है कि बच्चे भगवान का स्वरूप होते है। बच्चों में भगवान बसते है, लेकिन कई बार भगवान अपने बच्चों के साथ ही कुछ ऐसा कर देते है कि बच्चे की जिंदगी पहाड़ बन जाती है। कंबोडिया में जन्म एक बच्चे के साथ ही कुछ ऐसा ही हुआ है। इस बच्चे के सिर में 4 इंच लंबी दरार पड़ी है।

 baby boy with 4 inch deep crack in his entire skull, need help

जी हां बच्चे की खोपड़ी दो टुकड़ों में बंटी है। जो कोई भी उसे देखता है डर का भाग जाता है। 6 साल का फीक्ट्रा पोव जन्म जन्मा था तो उसके घर में खुशी के बजाए गम का माहौल हो गया। बच्चे के सिर में दरार की बात सुनकर घरवाले परेशान थे। पोव का जन्म कंबोडिया के छोटे से अस्पताल में हुआ, जहां पैसों की कमी की वजह से उसका इलाज किए बिना ही उसे घर भेज दिया गया। पैसे की कमी की वजह से उसका ऑपरेशन नही हो पाया और इस बच्चे को ऐसे ही घर भेज दिया गया।

 baby boy with 4 inch deep crack in his entire skull, need help

बिना इलाज के वो पिछले 6 साल से इसी तरह से अपनी जिंदगी काट रहा है। पोव के सिर में 4 इंच लंबी दरार है, जो धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। एक अजीबोगरीब बीमारी के कारण पोव के सिर का व्यास सामान्य से कही ज्यादा बड़ा हो गया और उसके सिर में दरार आ गई। इस बीमारी की वजह से वो न तो चल पाता है और ना ही बैठ पाता है। पोन के पिता की मौत उस वक्त ही हो गई जब वो अपनी मां के गर्भ में था। अब अकेली मां और दादी उसका पालन-पोषण कर रहे है। पोव की मां किसी भी तरह से अपने बच्चे का इलाज करवाना चाहती है। उसकी दादी पोव के इलाज के लिए पैसे जमा करने के लिए मंदिर के सामने भीख मांगती है।

वो हर वीकेंड पर वहां के अंगकोर वाट मंदिर पर पोव को लेकर जाती है और मंदिर के सामने बैठ जाती है। बच्चे को लेकर लोग उसे पैसे दे देते है। पोव की दादी कहती है कि जब वो पांच साल का था तो हमें लगता था कि उसके सिर में ज्यादा पानी भरा है इसलिए उसका सिर सामान्स से बड़ा है, लेकिन सिर की दरार धीरे-धीरे लंबी और गहरी होती जा रही है। दादी कहती है पोव के सिर की ये दरार इतनी गहरी है कि मैं आसानी से उसमें अपना हाथ डाल सकती हूं।

पोव की दादी कहती है कि लगभग 5 पाउंड एक दिन में एकत्रित हो जाते हैं। लेकिन इस बीमारी के ईलाज के लिए उन्हें बहुत पैसों की जरूरत है। डॉक्टर्स का कहना है कि उन्हें इस बीमारी के बारे में कुछ भी नहीं पता है और वह इसके लिए कुछ नहीं कर सकते हैं। स्थानीय एनजीओ के लोग उसे दवाईयों से मदद कर देते है, लेकिन पोव के ऊपर दवाईयों का कई असर नहीं हो रहा। उसकी मां और दादी चाहती है कि किसी तरह से कोई ऐसा आ जाए जो उनके बच्चे काईलाज कर उसे ठीक कर सके। हम दुआ करते है कि पोव जल्द ठीक हो सके।

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