विज्ञान या चमत्कार: आंध्रा के यागंती मंदिर में पल-पल बढ़ती है नंदी प्रतिमा, हैरान करने देंगे यहां के रहस्य?
Yanganti Temple Mystery Hindi News: आंध्र प्रदेश का यागंती मंदिर कई बड़े-बड़े रहस्यों को अपने अंदर समेटे हुआ है, जिसका जवाब ना विज्ञान दे पाया और ना ही वैज्ञानिक।

भारत ऐसे कई ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनका इतिहास हजारों साल पुराना है। ऐसा ही एक मंदिर आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित है, जिसका नाम श्री यागंती उमा माहेश्वरी मंदिर है। यागंती मंदिर को उमा माहेश्वरी मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जो कि भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जो वैज्ञानिक के लिए चुनौती बने हुए हैं।
अगस्त्या ऋषि ने मंदिर का कराया निर्माण
कई रहस्यों से परिपूर्णभगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को समर्पित श्री यागंती मंदिर पुरातन है। इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा शिवलिंग के स्वरूप में नहीं बल्कि पत्थर से निर्मित प्रतिमा के रूप में होती है। ऐसी मान्यता है कि अगस्त्या ऋषि ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसमें स्थापित महादेव की सवारी नंदी की प्रतिमा साल दर साल में आकार में बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से मंदिर के कई स्तंभ भी हटाने पड़ चुके हैं।
कई और मंदिर के गूढ़ रहस्य
दरअसल, सिर्फ नंदी प्रतिमा ही नहीं बल्कि कई और ऐसी चीजें हैं, जो विचित्र और रहस्यमयी है। यहां कौवों की आवाज नहीं आती। इसके अलावा यागंती मंदिर के गर्भगृह में शिव प्रतिमा के नीचे जमीन में पांच झरने बहते हैं, जिनका उद्गम स्थल किसी को नहीं पता। मंदिर वैष्णव परंपरा के अनुसार बनाया गया है।
भगवान शिव ने खुद कहा था मंदिर के लिए
ऐसी मान्यता है कि ऋषि अगस्त्या इस स्थल पर भगवान वेंकटेश्वर के लिए एक मंदिर बनाना चाहते थे। हालांकि, मंदिर के लिए जो मूर्ति बनाई गई थी, वह स्थापित नहीं हो सकी क्योंकि मूर्ति का पैर का नाखून टूट गया था। इससे परेशान ऋषि ने तपस्या करने का फैसला किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उनसे अपने लिए एक मंदिर बनाने को कहा।
क्योंकि मंदिर का स्थान कैलाश जैसा है। तब ऋषि ने देवी पार्वती की एक मूर्ति का अनुरोध किया और यह उन्हें प्रदान की गई। फिर भगवान शिव और देवी उमा माहेश्वरी के लिए एक मंदिर बनाया गया।
इस मंदिर परिसर से कौवे क्यों गायब हैं?
उमा माहेश्वरी मंदिर में कौवे की गैरमौजूदगी ध्यान केंद्रित करने वाली है। बताया जाता है कि इस गुफा मंदिर में अनादि काल से कौवे नहीं देखे गए हैं। किंवदंती है कि अगस्त्या ऋषि एक दिन जब ध्यान कर रहे थे, कौवों का एक झुंड वहां आ गया, जहां वो ध्यान में थे, वहां जोर-जोर से कांव-कांव करने लगे। इससे उनकी तपस्या भंग हो गई, जिसके बाद कौवों को श्राप दिया कि यज्ञती के आसपास वो नहीं घूम सकते। तब से मंदिर में कोई कांव-कांव नहीं सुना जा सकता है।
मुख्य मंदिर के पास कई गुफा
श्री यगंती मंदिर में को लेकर भक्तों का मानना है कि उमा माहेश्वरी के दर्शन से ही सभी कष्ट हल हो जाते हैं। यहां मुख्य मंदिर से सटे हुई कई गुफा मंदिर हैं। माना जाता है कि यहीं अगस्त्या गुफा वह स्थान है, जहां भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उन्होंने तपस्या की थी। वेंकटेश्वर गुफा इस इलाके की गुफाओं में से एक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गुफा में मिली भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति तिरुपति की मूर्ति से काफी पुरानी है।
नंदी प्रतिमा का बढ़ रहा आकार
इसके अलावा जो सबसे चर्चित रहस्य है, वो यह कि मंदिर में बनी नंदी की प्रतिमा लगातार बढ़ती जा रही है। दावा है कि नंदी की प्रतिमा हर साल बढ़ रही है। जिसकी वजह से वहां स्तंभ भी हटा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नंदी की मूर्ति, जो शुरू में छोटी थी, आकार में बड़ी हो गई, जो मंदिर परिसर में है। कई बुद्धिजीवियों और वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया है, लेकिन यह एक मायावी रहस्य बना हुआ है। अंत में वैज्ञानिकों ने कहा कि यह पत्थर बढ़ने की प्रवृत्ति रखता है, इसलिए यह हर 20 साल में एक इंच बढ़ता है। लेकिन भक्त इसे महादेव का चमत्कार मानते हैं।












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