नौकरी ने बढ़ाई पति पत्नी में दूरियां, हाईकोर्ट ने दिए स्मार्टफोन रखने के आदेश
बिलासपुर, 12 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैमिली कोर्ट की ओर से बच्चे की अभिरक्षा माँ को दिए जाने के खिलाफ दायर की गई अपील से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए बच्चे के माता और पिता को स्मार्टफोन रखने का निर्देश दिया है। सामाजिक तौर पर एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चे के साथ संपर्क रखने अधिकार को सरल बनाते हुए माता-पिता को वीडियो कालिंग के लिए स्मार्टफोन रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पिता को अपने बेटे और पत्नी के साथ अवकाश और त्यौहारों पर रहने की अनुमति प्रदान की है।

दरअसल छत्तीसगढ़ के तखतपुर इलाके के घोंघाडीह निवासी ललितराम जातवर की शादी रायपुर जिले के कुरा ग्राम में रहने वाली निवासी सुषमा से हुई थी। ललित अम्बिकापुर के मैनपाट में बीईओ और सुषमा बिल्हा में शिक्षाकर्मी थी। मार्च 2014 में जातवर दम्पत्ति का एक पुत्र हुआ, जो कि जन्म से ही अशक्त था। बच्चे के बेहतर इलाज के लिए मां ने अपना तबादला रायपुर करवा लिया। शासकीय नौकरी कर रहे पति पत्नी के बीच लगभग कई किलोमीटर का फासला होने से उनका मेलजोल कम हो गया और दोनो के बीच दूरियां बढ़ गईं।
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इस बीच ललितराम ने पत्नी पर बच्चे का सही इलाज न करवा पाने का आरोप लगाते हुए रायपुर फेमिली कोर्ट में खुद को पुत्र की अभिरक्षा देने की अपील लगाई। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 10 मई 2019 को अपील अस्वीकार करते हुए माता के पास ही अभिरक्षा जारी रखने की बात कही। फैमिली कोर्ट के फैसले से निराश पिता ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की। शुक्रवार को जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस रजनी दुबे की डिवीजन बेंच में इस मामले में सुनवाई की गई। हाईकोर्ट के डबल बेंच ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा कि बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करने संबंधित विवाद में, अन्य अभिभावक को बच्चे से मुलाकात करने और संपर्क करने का अधिकार होगा। इसके अलावा हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि बच्चे से सम्पर्क के अधिकार को सरल बनाने दोनों अभिभावकों को वीडियो कॉलिंग के लिए स्मार्टफोन रखना होगा।












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