महिलाओं के जींस पहनने पर आपत्ति करने वालों के लिए कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Court's strict remarks for those who object to women wearing jeans

बिलासपुर, 06 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हुई एक सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच रखने वालों के लिए नजीर बन गई है। बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस अग्रवाल की पीठ ने बच्चे की कस्टडी को लेकर दायर एक याचिका पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी महिला का चरित्र उसके जींस और टीशर्ट पहनने या पुरुष साथियों के साथ नौकरी के मकसद में बाहर जाने से तय नहीं किया जा सकता है ।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी सोच रखने से महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकार को लेकर जारी लड़ाई लंबी हो जाएगी। शुतुरमुर्ग की भांति विचारधारा रखने वाले समाज के कुछ लोगों के प्रमाण-पत्र से महिला का चरित्र तय नहीं कर सकते हैं।

इस मामले में शीर्ष अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मां को बच्चे की कस्टडी दे दी। महासमुंद जिले में रहने वाले सुधाकर और संगीता (परिवर्तित नाम) का विवाह साल 2007 में हुआ था। दो वर्ष बाद दोनों ने आपसी मंजूरी से तलाक ले लिया। इस दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि बेटा अपनी मां के पास रहेगा।

तलाक के बाद संगीता महासमुंद जिले में ही एक प्राइवेट कंपनी में कार्यालय सहायक पद पर नौकरी करने लगी। पांच वर्ष बाद सुधाकर ने फैमिली कोर्ट में मामला पेश करके अपने बेटे की कस्टडी की मांगी की। उसने अदालत के सामने यह तर्क दिया कि उसकी पूर्व पत्नी अपने पुरुष साथियों के साथ जींस और टीशर्ट पहनकर बाहर जाती है, इस कारण उसने अपनी पवित्रता को खो दिया है। ऐसी माता के साथ रहने से उसके बच्चे पर गलत प्रभाव पड़ेगा। उनसे अदालत के समक्ष अपनी पूर्व पत्नी पर कंपनी के प्रोपाइटर के साथ अवैध संबंध होने के आरोप भी लगाए।

पिता को अदालत से मिली यह सुविधाएं

पिता प्रत्येक शनिवार-रविवार को बच्चे से एक घंटे और बाकि दिनों में 5 से 10 मिनट बात कर सकेगा ।
दो सप्ताह से ज्यादा अवधि की छुट्टी में रहने पर पिता पुत्र को 7 दिनों तक साथ रख सकेगा।
महीने में शनिवार अथवा रविवार को पिता बच्चे के साथ बाहर जा सकेगा।
तीज त्यौहारों के अवसर पर पिता बेटे से मिलने आ सकेगा।

बच्चे को माता और पिता दोनों का स्नेह पाने का हक मिलना चाहिए

बहरहाल बिलासपुर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मां को बच्चे की कस्टडी सौंपने के आदेश जारी किये हैं। इसके अलावा पिता को बच्चे से मिलने जुलने की छूट दी है। हाईकोर्ट का कहना है कि बच्चे को माता और पिता का प्यार पाने का हक है। आज के दौर में आपसी संपर्क के लिए फोन कॉल, वीडियो चैट, इंटरनेट समेत कई माध्यम मौजूद हैं, इसलिए बच्चे को एक घर से दूसरे घर आने-जाने में किसी तरह की दिक्क्त भी नहीं होनी चाहिए।

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