आखिर नेपाल ही क्यों गई बाबा की हनीप्रीत...जानिए क्या है कनेक्शन?
स्कूल के टीचर, प्रिंसिपल और बच्चों ने भले ही हनीप्रीत के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी हो लेकिन आस-पास के लोगों ने जो जानकारी दी वो भी बेहद हैरान करने वाली थी।
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पटना। अय्याश बाबा राम रहीम को साध्वी से दुष्कर्म करने के आरोप में 20 साल की सजा सुनाई गई। सजा सुनाने के बाद वो जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहा है लेकिन बाबा कि मुंह बोली बेटी हनीप्रीत, जिसके साथ खुद राम रहीम के नाजायज संबंध होने के आरोप हनीप्रीत के पति ने ही लगाए हैं, वो भी पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए फरार हो गई। जिसकी गिरफ्तारी के लिए देश के कई राज्यों की पुलिस दिन-रात एक की हुई है लेकिन अब तक उसका कोई ठिकाना पुलिस को नहीं पता चला है। पुलिस अनुमान लगा रही है कि वो नेपाल चली गई है और ये अनुमान उस वक्त पुख्ता साबित हो गया जब सूत्रों के मुताबिक वो नेपाल में देखी गई।

हरियाणा-नेपाल पुलिस कर रही है कार्रवाई
नेपाल पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार करने के लिए हरियाणा पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। अब हम आपको बताने जा रहे हैं आखिरकार राम रहीम को सजा सुनाएं जाने के बाद हनीप्रीत नेपाल ही क्यों चली गई। क्या नेपाल जाकर वो अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रही है? आखिरकार नेपाल में उसका कौन मददगार है। ऐसे ही कई तरह के सवालों का जवाब हम आपको बताने जा रहे हैं, जिससे ये साबित हो जाएगा कि राम रहीम और हनीप्रीत का नेपाल कनेक्शन भी काफी मजबूत है। जिसके दम पर बाबा ने कभी कहा था हम जहां कदम रख देते हैं वहां भूचाल नहीं आता।

हनीप्रीत के लिए सेफ जोन!
हनीप्रीत के लिए सेफ जोन कहा जाने वाला नेपाल से उसका क्या नाता है? उसका कनेक्शन जानने के लिए हम आपको नेपाल के उस जगह ले चलते हैं जहां नेपाल में आई भीषण त्रस्ती के बीच बाबा राम रहीम और हनीप्रीत के साथ सैकड़ों लड़कियां आई थीं और कई दिनों तक डेरा डाले बैठी थीं। इस दौरान उसने नेपाल में वर्ष 2015 में एक डेरा शुरू किया था। जब उसकी हकीकत जानने के लिए हम उस डेरे के पास पहुंचे तो हनीप्रीत का कोई ठिकाना नहीं मिला लेकिन कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जिससे ये साबित हो गया कि बाबा और हनीप्रीत का नेपाल कनेक्शन ही काफी मजबूत था।

नेपाल के पहाड़ी रास्तों के बीच...
राजधानी काठमांडू से करीब 107 किलोमीटर दूर नेपाल का वो खतरनाक रास्ता, जहां दोनों तरफ सैकड़ों फिट नीचे उफनती नेपाल की त्रिसूरा नदी और पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए नुवानकोट राम रहीम के उस आश्रम पर पहुंचा गया। जहां साल 2015 में राम रहीम अपनी हनीप्रीत के साथ पहुंचा था और यहां आश्रम बनवाया था। कठिन रास्ते को पार करते हुए जब हम वहां पहुंचे तो एक तरफ बाबा का आश्रम तो दूसरी तरफ एक स्कूल नजर आया, जहां हनीप्रीत की तस्वीर दिखाते हुए स्कूल के बच्चे से इसके बारे में जानकारी ली गई। बच्चों ने तो इसकी जानकारी नहीं दी लेकिन एक शिक्षक ने जो जानकारी दी वो चौंकाने वाली थी...

क्या है डेरे का स्कूल कनेक्शन?
नुवानकोट के देवी घाट स्थित श्री शाहिद जगत प्रकाश सिंह जंग संस्कृत विद्यालय है, जिसके बगल में डेरा सच्चा सौदा का डेरा था। एक तरफ स्कूल का भवन तो दूसरी तरफ सच्चा सौदा का डेरा। जहां दीवार पर सच्चा सौदा और गुरमीत राम रहीम के डेरे के बारे में लिखा था। जब उस स्कूल के शिक्षक को हनीप्रीत की तस्वीर दिखाकर पूछा गया कि क्या वो यहां आई थी तो कुछ ने तो उसे पहचानने से भी इनकार कर दिया लेकिन कुछ वैसे शिक्षक भी स्कूल में थे जिन्होंने उस वक्त राम रहीम को देखा था। राम रहीम को देखने वाले शिक्षक ने कहा कि उस वक्त बाबा कहता था कि हमारे जहां कदम पड़ जाएं वहां कोई भूचाल नहीं आता है। इन टीचरों ने ये भी बताया कि राम रहीम के साथ करीब एक सौ लड़कियां थीं, उनमे हनीप्रीत कौन सी थी ये कहना मुश्किल है। वहीं स्कूल के प्रिंसिपल हेम प्रसाद अधिकारी ने बताया कि मई 2015 में जब भूकंप आया था तो राम रहीम यहां करीब चार सौ लोगों के साथ आया था। बाबा कभी-कभी ही अपने आश्रम से बाहर निकलता था। उसके बाद उनके लोग कभी नहीं आए हैं।

400 लड़कियों संग नेपाल आया राम रहीम
स्कूल के टीचर, प्रिंसिपल और बच्चों ने भले ही हनीप्रीत के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी हो लेकिन आस-पास के लोगों ने जो जानकारी दी वो भी बेहद हैरान करने वाली थी। पूछताछ के दौरान पंकज कर्के नाम के एक स्थानीय ने बताया कि राम रहीम के साथ चार सौ लोग आए थे, करीब पचास गाड़ियों के साथ। बाबा की सुरक्षा में लगभग सैकड़ों लड़कियां उन लोगों के साथ थीं। हनीप्रीत भी राम रहीम के साथ ही रहती थीं। जब राम रहीम कैंप की तरफ आते थे तो वो भी साथ आती थीं और साथ ही रहती थीं। कैंप में जाने की इजाजत किसी को नहीं थी। चारों तरफ सुरक्षाकर्मी रहते थे।

कभी कभी क्यों निकला था राम रहीम, साथ दिखती थी हनी
जब राम रहीम यहां मदद करने को आए थे तो कई लोगों ने उनका साथ दिया था। उनमे से एक नेपाल के सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सेहल के मुताबिक राम रहीम ने तब यहां अपना डेरा भी स्थापित किया था। जो लोग साथ आए थे वहीं रहते थे। ये इलाका काफी पिछड़ा है, इसी कारण यहां कई लोग बाबा के भक्त हो गए थे। हालांकि संतोष की मानें तो हाल के दिनों में यहां डेरे से संबंधित कोई भी नहीं आया है। जिसके बाद डेरे की इमारत में भी स्कूल ही खोल दिया गया है। संतोष बताते हैं जब राम रहीम इस इलाके में आया था तो इलाके के सांसद सहित कई प्रभवशाली लोग उसके साथ थे। हो सकता है इन लोगों को हनीप्रीत के बारे में पता हो।












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