PICs: बाढ़ के प्रलय का बार-बार क्यों शिकार होता है बिहार...
नेपाल के हिमालय से निकलने वाली ये नदी बिहार के भीम नगर के रास्ते भारत में पहुंचती है और हर साल बिहार में भयंकर तबाही मचाती है। इसी से निकलने वाली सात नदियां बिहार की तस्वीर बदल देती है।
पटना। बिहार में आई प्रलयकारी बाढ़ ने आम लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पूरा बिहार पानी-पानी हो गया है खासकर उत्तर बिहार के उन क्षेत्रों की स्थिति गंभीर बनी हुई है जहां हर साल बाढ़ अपनी विनाशलीला का रोद्र रुप दिखाती है। जिससे बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों में खासकर किसानों की हालत बदतर होती जा रही है। तो गरीब मजदूर रोटी के लिए तरस रहे हैं। आइए हम आपको बताते हैं बिहार में आने वाली ये भयानक बाढ़ का कारण आखिरकार कब तक ऐसा चलेगा।


बिहार में आने वाली भयंकर बाढ़ की त्रासदी नेपाल से शुरू होती है और हर साल बिहार के पश्चिमी क्षेत्रों में तबाही मचाती है। सबसे पहले हम बात करेंगे नेपाल से निकलने वाली नदियों के बारे में जिसकी वजह से हर साल बिहार पानी-पानी हो जाता है। उत्तर बिहार में खासकर नेपाल से निकलने वाली कुछ नदियां भयानक तबाही का मंजर दिखाती हैं। जिसमें सबसे प्रमुख नदी कोसी है। क्योंकि कोसी नदी से होकर सात नदियों का पानी बहता है। उन सात नदियों में - इंद्रावती, सुनकोसी, तांबकोसी, लिखुखोला, दूधकोसी, अरुण और तामूर नदी शामिल है। खासकर बरसात के मौसम में नेपाल के तराई वाले इलाके में भारी बारिश होती है और इन सभी नदियों को बिहार का शोक कहा जाता है। नेपाल के हिमालय से निकलने वाली ये नदी बिहार के भीम नगर के रास्ते भारत में पहुंचती है और हर साल बिहार में भयंकर तबाही मचाती है। बारिश के पानी के साथ-साथ ये अपने साथ बालू, कंकड़-पत्थर साथ लाती है।


आखिरकार नेपाल से ही क्यों आती है बाढ़?
इसकी वजह बिल्कुल साफ है, भारी बारिश के कारण नेपाल और भूटान के पर्वतीय क्षेत्रों से नदियों का तेज बहाव और गाद होना शुरू हो जाता है। जिसकी वजह से उसके रास्ते में रुकावट होने के कारण नदियों का मार्ग बदल जाता है और ये बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देते हैं। क्योंकि नेपाल से निकलने वाली नदियां, पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरती हैं। और ऐसा कहा जाता है कि नेपाल के पहाड़ों में सड़क बनाने के लिए पहाड़ और पेड़ों को काटा जाता है। जिसकी वजह से ये कमजोर हो जाते हैं और बारिश में और पानी के तेज बहाव के कारण पहाड़ों में लैंड स्लाइड होते हैं। जो पानी की धार में बहकर जमा हो जाती है। ऐसा होने से नदियों की गहराई कम हो जाती है और पानी नहीं रुकता है।

बिहार में आने वाली भयंकर बाढ़ का कारण तो क्षेत्र में होने वाली लगातार भारी बारिश भी है लेकिन नेपाल से आने वाला पानी भी बिहार में बाढ़ का प्रलयकारी मंजर दिखा देता है। क्योंकि बारिश की वजह से पहले ही बिहार की नदियां भरी हुई रहती हैं। जब नेपाल पानी छोड़ देता है तो ये और भयावह रूप धारण कर लेती है और बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। जिससे कोसी क्षेत्र के सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिंया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, फारबिसगंज और इससे आसपास के जिले में काफी तबाही देखने को मिलती है।

जिन नदियों से आती है बिहार में बाढ़
बिहार की इन नदियों से ही यहां हर साल बाढ़ आ जाती है। सबसे पहले हम बात करेंगे बिहार के गंडक नदी की तो ये नदी भी नेपाल से ही निकलकर बिहार में आती है। जिसे लोग नारायणी नदी के नाम से जानते हैं जो पटना के गंगा में मिलती है और इसकी लंबाई 1300 किलोमीटर बताई जाती है। दूसरी है बागमती नदी ये भी नेपाल से ही होकर आती है और लगभग 195 किलोमीटर यात्रा करते हुए नेपाल के रास्ते बिहार के सीतामढ़ी पहुंची है। जिसकी कुल लंबाई 394 किलोमीटर है और बरसात के दिनों में इसके कारण सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और मधुबनी में काफी तबाही देखने को मिलती है। इन नदियों के बाद बिहार में बाढ़ आने का सबसे मुख्य कारण पड़ोसी देश नेपाल है जो पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ है। नेपाल से ना जाने कितनी नदियां निकलती हैं जो बिहार और उत्तरप्रदेश के गंगा में विलीन हो जाती हैं।

बिहार में आने वाली बाढ़ को लेकर हर साल सरकार के द्वारा तरह-तरह के दावे किए जाते हैं। लेकिन बाढ़ के जाते ही सभी भूल जाते हैं और वापस बाढ़ आने पर फिर वही सरकार के दावे नजर आने लगते हैं। इससे बिहार वासियों को कब मुक्ति मिलेगी ये कहा नहीं जा सकता है। बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हालात ऐसे हैं कि लोग हर साल इसके शिकार हो रहे हैं और सरकार सिर्फ दावे करती नजर आती है।
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