मधेपुरा में पूर्णिया से अधिक 'यादव', फिर भी इस ‘गोप’ बहुल क्षेत्र से चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहते पप्पू यादव?
लोकसभा चुनाव से पहले बिहार महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस और आरजेडी के बीच कई सीटों बंटवारे का पेंच है जो कि सुलझ ही नहीं रहा है। सबसे अधिक घमासान पूर्णिया सीट को लेकर है। इस सीट पर पप्पू यादव ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है वहीं, आरजेडी यहां से बीमा भारती को लड़ाना चाहती है।
महागठबंधन के सबसे बड़े दलों की आपसी खींचतान की वजह से पूर्णिया लोकसभा सीट बिहार का हॉट लोकसभा सीट बन चुका है। दरअसल आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव चाहते थे कि पप्पू यादव मधेपुरा सीट से चुनाव लड़ें। मधेपुरा ही वो सीट है जहां पर 2014 की मोदी लहर में भी आरजेडी को जीत मिली थी।

एक दशक पहले अजित सरकार हत्याकांड में बरी होने के बाद जेल से निकले पप्पू यादव ने जदयू के कद्दावर नेता शरद यादव को मात दी थी। मधेपुरा के बारे में कहावत है कि 'रोम पोप का और मधेपुरा गोप का'। इसके पीछे की वजह यह है कि अपनी स्थापना के बाद से मधेपुरा में अब तक सिर्फ यादव ही सांसद बनते आए हैं।
मधेपुरा पप्पू यादव की कर्मभूमि रही है। पप्पू यादव पहली बार विधायक मधेपुरा जिले से ही बने थे। मधेपुरा में पूर्णिया की तुलना में लगभग दोगुने से भी अधिक यादव हैं। ऐसे में ये पप्पू यादव की राजनीति के लिए मुफीद भी है।
लेकिन सवाल ये है कि दस सालों में ऐसा क्या बदल गया है कि अब पप्पू यादव मधेपुरा से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं? पप्पू यादव की ऐसी क्या जिद है कि वे दुनिया छोड़ने की बात करते हैं मगर पूर्णिया नहीं...आइये समझने की कोशिश करते हैं।
पप्पू यादव मधेपुरा सीट से तीन बार लोकसभा चुनाव लड़े हैं, जिसमें दो बार जीते हैं और एक बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। पिछले चुनाव में वो मधेपुरा से ही लड़े थे जिनमें उन्हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था।
मधेपुरा में यादव और मुस्लिम आबादी सबसे अधिक है। मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में यादव वोटरों की संख्या करीब 22 फीसदी है। यादव के अलावा मुस्लिम वोटरों की संख्या भी करीब 13 फीसदी है। वहीं पूर्णिया की बात करें तो वहां पर यहां पर 40 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। वहीं यादव आबादी भी 8 से 9 फीसदी है। ऐसे में MY समीकरण का कमाल पूर्णिया में अधिक दिख सकता है।
पप्पू यादव इसी मुस्लिम-यादव समीकरण के सहारे संसद पहुंचने की जुगत में हैं। मधेपुरा में जेडीयू सांसद दिनेश चंद्र यादव उनका खेल बिगाड़ सकते हैं और 'यादव' वोट खींच सकते हैं मगर पूर्णिया में महागठबंधन के वोटों में बिखराव होने की संभावना कम है। यही वजह है कि पप्पू यादव पूर्णिया से चुनाव लड़ने पर अड़े हुए हैं।












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