RCP सिंह की एक मुलाकात ने बदल गया 7 सर्कुलर रोड का पूरा प्रोटोकॉल? बंद हुई नीतीश कुमार के आवास पर सीधी एंट्री

Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से एक नया घटनाक्रम लगातार चर्चा में बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास 7, सर्कुलर रोड पर लोगों की एंट्री और मुलाकात की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब कोई भी नेता, कार्यकर्ता या आम नागरिक सीधे जाकर उनसे मुलाकात नहीं कर सकेगा। नई व्यवस्था के तहत पहले आने वाले व्यक्ति की पहचान दर्ज होगी, फिर उसकी जानकारी कार्यालय प्रभारी के पास भेजी जाएगी।

कार्यालय प्रभारी के पास से मंजूरी मिलने के बाद ही मुलाकात की अनुमति मिलेगी। इस बदलाव ने इसलिए भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है क्योंकि कुछ समय पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और जदयू के पूर्व नेता आरसीपी सिंह ने अचानक नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। इसके बाद सुरक्षा और मुलाकात की व्यवस्था में बदलाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

Nitish Kumar

आरसीपी सिंह की मुलाकात के बाद बदली व्यवस्था

नई व्यवस्था ऐसे समय लागू की गई है जब हाल ही में आरसीपी सिंह ने 7, सर्कुलर रोड पहुंचकर नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए क्योंकि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक दूरी मानी जाती रही है।

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कभी जदयू के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले आरसीपी सिंह पार्टी छोड़ने के बाद अलग राह पर चल पड़े थे। ऐसे में उनका अचानक पूर्व मुख्यमंत्री से मिलना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया।

अब सीधे नहीं हो सकेगी मुलाकात

नई व्यवस्था के मुताबिक अब किसी भी व्यक्ति को पहले अपनी पूरी जानकारी दर्ज करानी होगी। इसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर और मिलने का कारण बताना जरूरी होगा। इसके बाद यह जानकारी कार्यालय प्रभारी के पास भेजी जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित व्यक्ति का नाम मुलाकात करने वालों की सूची में जोड़ा जाएगा। केवल सूची में शामिल लोगों को ही आवास के अंदर जाने की अनुमति मिलेगी।

कार्यालय प्रभारी की मंजूरी जरूरी

सूत्रों के अनुसार अब पूरी मुलाकात प्रक्रिया कार्यालय प्रभारी की अनुमति पर आधारित होगी। अगर किसी व्यक्ति को स्वीकृति नहीं मिलती है तो उसे परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

पहले कई लोग सीधे आवास पहुंचकर मिलने की कोशिश करते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था लगभग खत्म कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और मुलाकातों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना है।

नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं पर भी लागू होंगे नियम

यह नियम सिर्फ राजनीतिक नेताओं के लिए नहीं है। जदयू कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आम लोगों को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। पहले उनकी पहचान की जांच होगी। इसके बाद जरूरी जानकारी कार्यालय को भेजी जाएगी और मंजूरी मिलने पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

क्या-क्या जानकारी देनी होगी

नई व्यवस्था के तहत हर आगंतुक को अपना नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर और मुलाकात का उद्देश्य बताना अनिवार्य होगा। कार्यालय इन जानकारियों की जांच करने के बाद फैसला करेगा कि संबंधित व्यक्ति को मुलाकात की अनुमति दी जाए या नहीं। बिना स्वीकृति किसी को भी 7, सर्कुलर रोड परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

इस बदलाव को लेकर बिहार की राजनीति में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सामान्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कई राजनीतिक जानकार इसे हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़कर देख रहे हैं।

हालांकि जदयू या नीतीश कुमार की ओर से इस नई व्यवस्था पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि समीक्षा के बाद मुलाकात की पूरी प्रक्रिया को पहले से अधिक नियंत्रित और व्यवस्थित बनाने का फैसला लिया गया है।

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