जब पगला बाबा ने दिया श्राप, 'लालू यादव तुम्हारा घमंड मिट्टी में मिल जाएगा'
बिहार में लोग लालू यादव पर आए इस मुसीबत को पगला गुरु के भविष्यवाणी के साथ जोड़ कर देखने लगे हैं। यह पगला गुरु लालू प्रसाद यादव के तांत्रिक गुरु थे।
पटना। इन दिनों राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का परिवार नाजुक हालातों के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां सीबीआई की दबिश तो दूसरी तरफ महागठबंधन पर उठ रहे सवालों का जवाब देना लालू परिवार के लिए एक मुसीबत बनता जा रहा है। बिहार में लोग लालू यादव पर आए इस मुसीबत को पगला गुरु के भविष्यवाणी के साथ जोड़ कर देखने लगे हैं। यह पगला गुरु लालू प्रसाद यादव के तांत्रिक गुरु थे। लोग उनके यहां अपनी समस्या लेकर जाया करते थे। एक बार लालू प्रसाद यादव जब इनके दरबार मिर्जापुर में पहुंचे तो पगला बाबा ने उन्हें देखते हुए कहा था कि लालू तुझे घमंड है कि तू बहुत बड़ा पुरोधा है, तू एकदिन मिट्टी में मिल जाएगा। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला...

औघड़ थे पगला गुरु
विभूति नारायण उर्फ पगला बाबा एक औघड़ थे जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर मे अपना दरबार लगाते थे। दूर-दूर से भक्त इनका दर्शन करने आते थे और आशीर्वाद लेकर जाते थे। यहां आने जाने वाले भक्तों का कहना था कि बाबा की उम्र साढ़े 400 साल की है और इनके द्वारा कही गई हर बात सत्य साबित होती है क्योंकि यह औघड़ है। इस औघड़ बाबा के दरबार में लालू यादव भी जाया करते थे। कई बार बाबा ने लालू प्रसाद यादव परिवार पर आई मुसीबतों को दूर करने के लिए इन्होने अनुष्ठान भी किया था।

लालू यादव को दिया श्राप
27 जुलाई 2013 को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद यादव चुनाव में जीत का आशीर्वाद लेने बाबा के दरबार में पहुंचे थे और सत्ता वापसी के लिए पगला बाबा से गुप्त अनुष्ठान कराई थी। इसी अनुष्ठान के दौरान पगला गुरू ने बातों ही बातों में लालू यादव को श्राप दे डाला कि 'लालू तुझे घमंड है कि तू बहुत बड़ा पुरोधा है, तू एकदिन मिट्टी में मिल जाएगा।' अनुष्ठान के दौरान लालू यादव ने मीडिया स बात करते हुए कहा था कि बाबा से मेरा पुराना संबंध है। जब हमारी बीमारी ठीक करने में डॉक्टर का हाथ पैर फूलने लगा था तब बाबा ने गंभीर बीमारी से हमें बचाया था।

14 अप्रैल को बाबा ने ली आखिरी सांसे
बता दें कि पगला गुरू तंत्र साधक थे जो अपने अटपटे कार्यों के लिए चर्चित थे। अपनी समस्या से पीड़ित हो कर भक्त जैसे ही उनके पास पहुंचते थे वह गाली देते हुए बात करते थे तथा डंडे से उसका दुख हरते थे। उनके करीबी भक्तों का ऐसा कहना था कि जब कभी भक्तों के द्वारा बाबा को सच्चे मन से याद किया गया वह उनके सामने प्रकट हो जाते थे। इसी साल 14 अप्रैल को पगला बाबा ने विंध्याचल के आश्रम में आखरी सांस ली और चाहने वालों को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ चले गए।












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