Election 2024: पवन सिंह ने आसनसोल से चुनाव क्यों नहीं लड़ा? भोजपुरी नेता ने पहली बार खोली जुबान
भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट से पवन सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले बीजेपी ने पवन सिंह को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टिकट दिया था मगर उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था।
इस बीच पवन सिंह मंगलवार को रोड शो करने के लिए अपने चुनावी लोकसभा क्षेत्र पहुंचे। इस दौरान पवन सिंह ने मीडिया से भी बातचीत की। मीडिया से बातचीत में पवन सिंह ने पहली बार आसनसोल सीट से चुनाव नहीं लड़ने को लेकर कुछ कहा है।

आसनसोल सीट से टिकट मिलने के बाद खुशी जताने और कुछ ही समय बाद टिकट लौटाने के सवाल पर पवन सिंह ने एबीपी न्यूज से कहा, "जो बीत गई सो बात गई। मैं बहुत ज्यादा नहीं बोलता। मैं हर किसी का सम्मान करता हूं। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी जनता के बीच में हूं। मुझे जो प्यार-आशीर्वाद मिल रहा है वो आपको दिख रहा है।"
हालांकि पवन सिंह ने आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ने के पीछे की वजह को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा कि कुछ पर्सनल बात है। उसे अंदर ही रहने दीजिए। हर बात को वह बाहर नहीं निकालना चाहते।
सातवें चरण में है काराकाट सीट पर चुनाव
बता दें कि काराकाट लोकसभा सीट पर 7वें चरण में चुनाव होना है। इस सीट से एक तरफ जहां पवन सिंह निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे हैं तो वहीं एनडीए से उपेंद्र कुशवाहा मैदान में हैं। महागठबंधन से भाकपा माले के प्रत्याशी राजाराम सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं।
काराकाट लोकसभा सीट रोहतास जिले में है। काराकाट लोकसभा क्षेत्र पहले बिक्रमगंज लोकसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह काराकाट लोकसभा बन गया। काराकाट लोकसभा सीट में रोहतास और औरंगाबाद जिले के 3-3 विधानसभा इलाके आते हैं।
काराकाट से क्यों लड़ रहे पवन सिंह?
काराकाट लोकसभा क्षेत्र पवन सिंह के गृहजिले आरा के समीप है। आरा और काराकाट की दूरी 70 किलोमीटर है। आरा के भोजपुर से काराकाट सटा हुआ है। काराकाट सीट पर आरा की तरह ही बड़ी संख्या में सवर्ण खासकर राजपूत आबादी है। यहां दो लाख से ज्यादा राजपूत वोटर हैं। इसके साथ ही 75 हजार ब्राह्मण और करीब 50 हजार भूमिहार वोटर हैं।
काराकाट सीट से एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और सीपीआई(एमएल) के राजा राम सिंह दोनों ही कोयरी जाति से आते हैं। ऐसे में यहां कोइरी-कुर्मी जाति के वोट बंट सकते हैं। पवन सिंह राजपूत जाति से आते हैं। अगर काराकाट में जातीय आधार पर प्रत्याशी चुने जाते हैं तो ये पवन सिंह के लिए फायदेमंद हो सकता है।












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