NEET-UG परीक्षा से एक दिन पहले आखिर पटना के उस घर में क्या हुआ, आरोपी छात्र ने बताई पूरी कहानी

नीट-यूजी परीक्षा के दौरान बिहार के पटना में पेपर लीक का मामला सामने आया था। इस पूरे मामले में भाजपा की ओर से आरोप गाया गया था कि इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड को तेजस्वी यादव ने ही कमरा किराए पर दिलाया था।

पटना में जिस घर में कथित आरोपी को कमरा किराए पर दिया गया था, उस घर के मालिक और किराए पर रुके युवक दोनों ने अपना पक्ष रखा है। आरोप है कि इसी कमरे में कथित आरोपी ने परीक्षा के एक दिन पहले रात में लीक पेपर से अपनी तैयारी की थी।

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इस घर में तकरीबन 25 नीट अभ्यर्थी रुके थे, जोकि एक प्ले स्कूल है। आरोप है कि यह सब संजीव मुखिया के इशारे पर हुआ जोकि लीक पेपर में को सोल्व करने वाले गैंग का हिस्सा था।

यहां किराए पर रुके आशुतोष ने दावा किया है कि उसका दोस्त मनीष उसे यहां 4 मई यानि परीक्षा के एक दिन पहले लेकर आया था। उसने बताया कि घर के मालिक प्रभात को उसने अगले दिन इस बारे में बताया तो उसने उससे माफी मांगी।

आशुतोष ने कहा कि मनीष ने मुझसे पूछा कि क्या वह यहां कुछ छात्रों को ला सकता है ताकि वहअगले दिन परीक्षा की तैयारी कर सकें तो मैंने कहा कि मकान मालिक प्रभात से पूछ लो। मनीष ने आशुतोष से कहा कि उसने प्रभात से बात की है और उसने यहां छात्रों को लाने की इजाजत दे दी है। उसने कहा कि वह 4-5 छात्रों को लाएगा। लेकिन यहां कम से कम 15-20 छात्र आ गए।

आशुतोष ने दावा किया कि उसने मनीष के हाथ में फोटो कॉपी देखी, उसने इसे छात्रों को दिया। अगले दिन मैं अपनी बहन के लिए लड़का देखने जमशेदपुर चला गया। मेरी पत्नी ने मुझे फोन किया और बताया कि मेरे घर पर पुलिस ने छापा मारा है। इसके बाद मैंने प्रभात को फोन करके बताया कि क्या हुआ है।

वहीं घर के मालिक प्रभात ने इससे इनकार किया है। उसने कहा कि वह संजीव मुखिया को नहीं जानता है। प्रभात का कहना है कि उसने घर आशुतोष को किराए पर एक वर्ष पहले दिया था और उसे यह नहीं पता था कि यहां 4 मई को इतने लोग आ जाएंगे।

आरोप है कि सबसे पहली लीक पेपर संजीव मुखिया को प्रोफेसर के जरिए मिले थे। मुखिया इस वक्त फरार है और बिहार की पुलिस उसे तलाश कर रही है। संजीव मुखिया का नाम 2010 में भी पेपर लीक मामले में आ चुका है।

मुखिया को बिहार में पेपर लीक का मास्टर माइंड माना जाता है। उसने बिहार पुलिस सर्विस कमीशन का भी पेपर लीक किया था। बाद में उसने कथित तौर पर इस पूरे काम के लिए गैंग का गठन कर लिया। संजीव मुखिया का बेटा शिव कुमार भी पहले पेपर लीक मामले में गिरफ्तार हो चुका है और अभी भी जेल में बंद है।

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