'ऐसी चीजों पर बोलना ही नहीं चाहिए', बिहार सरकार में मंत्री के रामचरितमानस वाले बयान पर तेजस्वी यादव
बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथ रामचरितमानस की तुलना पोटेशियम साइनाइड से करने वाली कथित टिप्पणी से सियासत गरमा चुकी है। एक तरफ, शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर अपने बयान के चलते सवालों के घेरे में नजर आ रहे हैं। गैर बीजेपी दलों के इंडिया गठबंधन भी कटघरे में नजर आ रहा है। इस बीच राज्य के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
तेजस्वी ने कहा कि यह एक व्यक्तिगत, धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा सवाल है। हम संविधान में विश्वास करने वाले हैं और हमें लगता है कि वह ऐसी चीजों पर बोलना नहीं चाहिए और उन्हें नजरअंदाज करना चाहिए। लेकिन, नकारात्मक बातों पर भी चर्चा नहीं होनी चाहिए। सकारात्मक बात पर चर्चा जरूर होनी चाहिए। देशभर में शिक्षा विभाग ने इतनी नौकरी नहीं निकाली गई, उसपर चर्चा नहीं हो रही है। अब सारे शिक्षक स्कूल जाने लगे हैं, इसपर भी चर्चा नहीं हो रही है।

बीजेपी ने बताया 'बीमार मानसिकता'
इस बीच, शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीजेपी मीडिया पैनलिस्ट नीरज कुमार ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने महान सनातन धर्म का अपमान किया है, जिसमें संत रविदास और स्वामी विवेकानंद जैसे प्रगतिशील लोग शामिल हैं। हम जानना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
#WATCH | Patna: On Bihar Education Minister Chandra Shekhar's reported remark comparing Ramcharitmanas to potassium cyanide, Bihar Deputy CM Tejashwi Yadav says, "...This is a personal, a question related to religious beliefs. We are believers of the Constitution and we feel that… pic.twitter.com/ewjPyNXyxW
— ANI (@ANI) September 15, 2023
मंत्री नित्यानंद राय बोले- तुष्टीकरण को शरण देने वाली सरकारें साइनाइड
उधर, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि किसी को इन जैसे प्राचीन ग्रंथों पर टिप्पणी करने से पहले "रामायण' की प्रत्येक पंक्ति को पढ़ना चाहिए और प्रत्येक शब्द के सार को समझना चाहिए। मैं सुझाव दूंगा कि एक गुरु रखें, रामायण की प्रत्येक पंक्ति पढ़ें और प्रत्येक शब्द का सार समझें और फिर रामायण-महाभारत पर टिप्पणी करें...उन्हें ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए...यह उनकी बीमार मानसिकता का प्रतिनिधित्व करता है...यह दर्शाता है तुष्टिकरण की मानसिकता...महाभारत और रामायण साइनाइड नहीं हैं...तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और अपराधियों को शरण देने वाली सरकारें साइनाइड हैं।












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