बेटे के साथ BJP में शामिल हुए बाहुबली सुनील पांडे, तरारी सीट से विशाल लड़ सकता है उपचुनाव!
Sunil Pandey News: बिहार में चार सीटों पर उपचुनाव होने है। उपचुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) को बड़ा झटका लगा है। जी हां..बिहार के जाने-माने बाहुबली और चार बार के विधायक सुनील पांडे ने अपने बेटे के साथ भाजपा में शामिल हो गए हैं।
सुनील पांडे ने रविवार 18 अगस्त को अपने बेटे विशाल प्रशांत के साथ बीजेपी की सदस्यता ली। इससे पहले सुनील पांडे पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी का हिस्सा थे। उनके बीजेपी में शामिल होने बाद अब पशुपति पारस के साथ सिर्फ सूरजभान सिंह ही प्रमुख चेहरा रह गए हैं।

तरारी विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने बनाई नई रणनीति
खबर के मुताबिक, तरारी विधानसभा उपचुनाव के लिए नई रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत बीजेपी बाहुबली नेता सुनील पांडे के बेटे को अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है। हालांकि, यह सिर्फ अभी राजनीतिक चर्चा है, इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, तरारी सीट पर भाकपा माले का कब्जा है।
सुनील पांडे ने पार्टी में किया स्वागत
रविवार को प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने प्रदेश कार्यालय में सुनील पांडेय और उनके बेटे का औपचारिक रूप से पार्टी में स्वागत किया। सुनील पांडे ने बीजेपी ज्वाइन करने के बाद 'जय श्री राम' का नारा लगाकर अपना उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से NDA कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं।
सुनील पांडे की एंट्री को लेकर विवाद
उनका लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को जीत दिलाकर सरकार बनाना है। सुबह 8 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय में सुनील पांडे के सदस्यता कार्यक्रम से पहले उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी वाले पर्चे बाहर चिपकाए गए। इससे पता चलता है कि भाजपा में उनके प्रवेश को लेकर कुछ विरोध है। पार्टी नेताओं की नजर पड़ते ही पर्चे तुरंत हटा दिए गए।
काफी दबंग छवि के नेता है सुनील पांडे
सुनील पांडे की छवि एक दबंग नेता की है। 34 साल की उम्र में वे पहली बार 2000 में समता पार्टी के टिकट पर पीरो से जीतकर विधायक बने थे। फरवरी और अक्टूबर 2005 के उपचुनाव में वे फिर जीते और उसके बाद 2010 में जेडीयू के टिकट पर तरारी से जीते। हालांकि, उनके खिलाफ आपराधिक मामलों के चलते जेडीयू ने 2015 में उनसे दूरी बना ली थी।
पत्नी गीता पांडे को करना पड़ा था हार का सामना
2015 में सुनील पांडे की पत्नी गीता पांडे ने लोजपा के टिकट पर तरारी से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गईं। 2020 के विधानसभा चुनाव में सुनील पांडे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे और दूसरे नंबर पर रहे, जबकि भाजपा के कौशल विद्यार्थी तीसरे नंबर पर रहे। सुदामा प्रसाद उस चुनाव में जीते, लेकिन उसके बाद आरा लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुंचे।
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