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Bihar इस DSP को भेजा गया जेल, महिला का बनाया था वीडियो, की थीं सारे हदें पार, जानिए क्या है पूरा मामला

DSP Somesh Mishra Bihar News: सोमेश कुमार मिश्रा नामक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) ने भागलपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। 20 मार्च 2020 को दर्ज यौन शोषण के एक मामले में वह वांछित थे। उनके सरेंडर के बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मूल रूप से गोड्डा जिले के रहने वाले मिश्रा वर्तमान में गया जिले के मुख्यालय में डीएसपी के पद पर तैनात हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी: सोमेश मिश्रा के खिलाफ मामला भागलपुर के महिला थाने में दर्ज किया गया था। एक युवती ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, जब वह प्रशिक्षु डीएसपी थे। जांच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें झारखंड के साहिबगंज में रेलवे क्वार्टर से गिरफ्तार कर लिया गया।

DSP Surrenders

गिरफ्तारी के बाद मिश्रा को जमानत मिलने से पहले कुछ समय जेल में रहना पड़ा। हालांकि, भागलपुर सिविल कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान वह बार-बार पेश नहीं हुए। नतीजतन, 30 जुलाई 2024 को कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और अदालत की अवमानना और निर्देशों का पालन न करने के कारण उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया।

आरोप और कानूनी कार्रवाई: पीड़िता ने मिश्रा पर आरोप लगाया कि उसने उसे दिल्ली बुलाकर उसका यौन शोषण किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि मिश्रा ने अश्लील वीडियो बनाए और उसे ब्लैकमेल किया। इन आरोपों के बावजूद, उसने शादी कर ली, लेकिन दावा किया कि मिश्रा शादी के बाद भी उसे धमकाता रहा।

पीड़िता ने मामले की शिकायत तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष भारती से की। शिकायत की समीक्षा के बाद मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए। गिरफ्तारी और आरोप पत्र दाखिल होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मिश्रा को निलंबित कर दिया।

अदालती सुनवाई और बचाव: भागलपुर सिविल कोर्ट में एडीजे 1 लवकुश कुमार की अध्यक्षता में सुनवाई के दौरान मिश्रा ने सरेंडर कर दिया। उनके बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि गया पितृपक्ष मेले में ड्यूटी की वजह से वे पिछली सुनवाई में शामिल नहीं हो पाए थे। हालांकि, कोर्ट ने इसे अवमानना और न्यायिक समय की बर्बादी माना।

मिश्रा की प्रारंभिक गिरफ्तारी तत्कालीन एएसपी सिटी पूरन कुमार झा के निर्देशन में तत्कालीन महिला थाना प्रभारी रीता कुमारी के नेतृत्व में हुई थी। पीड़िता द्वारा 2020 में शिकायत दर्ज कराने के तुरंत बाद ही गिरफ्तारी हुई थी।

यह मामला कानून प्रवर्तन जवाबदेही और यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए न्याय के महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करता है। कानूनी कार्यवाही जारी है क्योंकि अधिकारी पीड़ित के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं और सभी संबंधित पक्षों के लिए उचित प्रक्रिया सुनिश्चित कर रहे हैं।

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